क्षेत्र पंचायत के ब्लाक प्रमुख के निर्वाचन की तैयारियां पूरी हो गईं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, वीडियोग्राफी तथा सीसी टीवी कैमरों की निगरानी में शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 से तीन बजे तक नामांकन प्रक्रिया चलेगी।
गुरुवार को जिलाधिकारी शंभूनाथ, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सौमित्र यादव तथा मुख्य विकास अधिकारी प्रताप सिंह भदौरिया ने कलक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में सभी एआरओ, पर्यवेक्षकों की बैठक लेकर दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि चुनाव में किसी प्रकार की लापरवाई क्षम्य नहीं होगी। शुक्रवार को अधिकारी प्रत्येक दशा में सुबह 9:30 बजे तक ब्लाक मुख्यालय पहुंच जाएं। चुनाव संबंधी प्रक्रिया ब्लाक मुख्यालयों पर ही होगी। चुनाव परिणाम की घोषणा और विजयी प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र देने का कार्य जिला मुख्यालय पर होगा।
बताया गया कि नामांकन वापस लेने के लिए उम्मीदवार को स्वयं उपस्थित होना होगा। मतगणना के अवसर पर उम्मीदवार के अलावा प्रस्तावक या अनुमोदक एक ही व्यक्ति प्रवेश कर सकेगा। मतदाता फोटोयुक्त मतदाता सूची के आधार पर ही मतदान कर सकेंगे।
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अंकों में दर्ज किया जाएगा मत
बदायूं। जिला मजिस्ट्रेट शंभू नाथ ने कहा है कि क्षेत्र पंचायतों के प्रमुख के निर्वाचन में मतदाताओं को मतपत्र पर अंतर्राष्ट्रीय अंकों 1,2,3 अंग्रेजी अंकों में अंकित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अन्य किसी प्रकार से अथवा अंकों को शब्दों में लिखकर मत अंकित करने पर मत निरस्त माना जाएगा। चुनाव में सफेद रंग का मतपत्र प्रयोग किया जाएगा। उम्मीदवारों के नाम हिंदी में वर्णमाला क्रम में लिखे होंगे। मतदाता मतपत्र पर बैंगनी रंग के स्केच पेन से मत अंकित करेंगे।
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ब्लाकों में यह रहेगा आरक्षण
बदायूं। क्षेत्र पंचायतों के प्रमुख निर्वाचन में विधिवत आरक्षण की व्यवस्था प्रभावी रहेगी। सहसवान, वजीरगंज, उझानी, इस्लामनगर तथा बिसौली ब्लाक अनारक्षित श्रेणी में हैं। म्याऊं ब्लाक अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। सालारपुर तथा कादरचौक ब्लाक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। अंबियापुर एवं समरेर ब्लाक पिछड़ा वर्ग की माहिला, दातागंज, दहगवां, उसावां ब्लाक पिछड़ा वर्ग तथा ब्लाक आसफपुर एवं जगत महिला के लिए आरक्षित हैं।
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ये रहेगी सुरक्षा व्यवस्था
बदायूं। एसएसपी सौमित्र यादव ने बताया कि प्रत्येक ब्लाक पर थानाध्यक्ष के अलावा चार एसआई, एक हेड कांस्टेबल तथा 20 कांस्टेबल महिलाओं सहित लगाए जाएंगे। नामांकन के लिए ब्लाक परिसर में अधिकृत व्यक्ति ही प्रवेश कर सकेंगे। प्रत्येक ब्लाक के समीप ही वाहन पार्किंग की व्यवस्था कराई जाएगी। जिन ब्लाकों में मात्र एक ही नामांकन होगा, वहां के पुलिस बल को दूसरे ब्लाकों में लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर कोई व्यक्ति किसी को नामांकन से रोकने का प्रयास करे या किसी प्रकार की धमकी मिले तो संबंधित एसओ को अवश्य बताएं।
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चुनाव व्यय राशि दो लाख
बदायूं। क्षेत्र पंचायत के प्रमुख के निर्वाचन में उम्मीदवार द्वारा दो लाख रुपये चुनाव में व्यय करने की सीमा निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्ग के लिए नामांकन पत्रों की कीमत चार सौ तथा जमानत राशि पच्चीस सौ रुपये तय की गई है। सामान्य वर्ग के लिए नामांकन पत्र का मूल्य आठ सौ रूपये तथा जमानत राशि पांच हजार रुपये निर्धारित की गई हैं। एक प्रत्याशी अधिकतम चार नामांकन पत्र दाखिल कर सकता है। नामांकन पत्र पर उम्मीदवार तथा उसके प्रस्तावक एवं अनुमोदक का स्व प्रमाणित फोटोग्राफ तथा हस्ताक्षर एवं अंगूठा निशानी अनिवार्य रूप से लगे हों। आरक्षित प्रत्याशियों को आरक्षण प्रमाण पत्र देना आवश्यक होगा।
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...कहीं वाकओवर तो नहीं दे दिया विपक्षी दलों ने
सपा के अलावा किसी दल ने घोषित नहीं किए अपने प्रत्याशी
सत्तापक्ष के प्रत्याशी जीत के प्रति ज्यादा दिख रहे हैं आशावान
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। पंचायत चुनाव के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ। इसमें भी सूबे के अंदर सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का परचम रहा। अब ब्लाक प्रमुख के पद को लेकर चुनावी बिगुल बज चुका है। इस चुनाव को लेकर जो राजनैतिक परिदृश्य रहा है, उसके तहत मात्र समाजवादी पार्टी ने ही अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं. बाकी किसी भी पार्टी ने अपने बैनर पर प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं, सो राजनीतिक गलियारों में इस बात का ज्यादा शोर हो रहा है कि प्रत्याशी घोषित नहीं किए जाने से साफ दिख रहा है कि इन दलों ने वाकओवर दे दिया है।
सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव को शुरू से ही गंभीरता से लिया। सो सपा का टिकट चाहने वालों की हर ब्लाक क्षेत्र में कई-कई दावेदार रहे। किसी भी नाराजगी से बचने के लिए जिला स्तर के नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने प्रत्याशी घोषित करने की गेंद हाईकमान के पाले में डाल दी थी। हाईकमान ने ही प्रत्याशी घोषित किए। हालांकि प्रत्याशी घोषित होने के बाद कुछ स्थानों पर विरोध के स्वर भी उठे, लेकिन वह ज्यादा कुछ असर नहीं दिखा सके।
सपा के प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी भाजपा, कांग्रेस और बसपा जैसे प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि इन दलों के प्रत्याशी घोषित नहीं किए जाने के पीछे यहीं है कि यह चुनाव सत्तापक्ष के पक्ष में ही रहता है, लिहाजा, अपने प्रत्याशी घोषित कर पार्टी पर किसी तरह का दाग नहीं लगाना चाहते। इधर, सपा का टिकट मिलने के बाद ज्यादातर प्रत्याशी चहकते नजर आ रहे हैं।