तीन घंटे में सही हो पाया बूम
बूम की मरम्मत के दौरान हालांकि ट्रेनों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत राहगीरों को हुई। जाम की वजह से छोटे वाहन सवार पीछे मुड़कर नहीं निकल पाए। बूम ठीक करने में मैकेनिकों को करीब तीन घंटे लगे। इसके बाद फाटक खुलने पर जाम में फंसे राहगीरों समेत वाहन सवार लोगों ने राहत की सांस ली। बता दें कि अढ़ौली फाटक से होकर उझानी-कादरचौक रोड पर वाहन निकलते हैं।
जाम में फंसी एंबुलेंस में गूंजी किलकारी
अढ़ौली फाटक का बूम क्षतिग्रस्त हो जाने के दौरान जाम में फंसी एंबुलेंस में इलाके के गांव अचौरा निवासी नन्हे मौर्य की गर्भवती पत्नी ऊषा की जान पर बन आई। प्रसव पीड़ा से कराहती ऊषा की हालत बिगड़ती देख एंबुलेंस के चालक वीरेश और पति नन्हे ने बाइकों समेत कारों को साइड में कराने की कोशिश भी की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
एंबुलेंस में गर्भवती ऊषा के साथ आशा कार्यकर्ता भी थीं। आशा कार्यकर्ता ने ऊषा का प्रसव कराया। ऊषा ने एंबुलेंस में बच्ची को जन्म दे दिया। जाम खुलने के बाद पुलिसकर्मियों ने सबसे पहले एंबुलेंस को फाटक से होकर निकलवा कर अस्पताल पहुंचाया।
एंबुलेंस चालक वीरेश ने बताया कि जब वह ऊषा को लेकर चले, तो गोशाला फाटक बंद थी। बाजार में भीड़ होने की आशंका के चलते उन्होंने अढ़ौली फाटक की ओर रुख किया था। पति नन्हे का कहना है कि उनके पहले से दो बेटियां हैं। तीसरी संतान के रूप में बेटी जन्मी है।
रेलवे के वाणिज्य अधीक्षक केपी सिंह ने बताया कि बूम क्षतिग्रस्त होने पर गेटमैन की कॉल स्टेशन मास्टर के पास आई, उसी दौरान उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया। मैकेनिकों ने बूम ठीक कर दिया है, लेकिन इस दौरान करीब ढाई-तीन घंटे तक फाटक से होकर वाहनों की आवाजाही बंद रही।