बदायूं। महिला अस्पताल और जिला अस्पताल में मरीजों को सस्ती और अच्छी दवाएं मुहैया कराने के लिए खोले गए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर अब ताले पड़ गए हैं। बताते हैं कि करीब छह महीने से केंद्रों को दवाएं नहीं मिल रही थीं। इसलिए धीरे-धीरे इन पर दवाईयां खत्म होती गईं और अब इन पर ताले डाल दिए गए। इससे दोनों अस्पतालों के मरीजों को सस्ती और अच्छी दवाएं मिलना मुश्किल ही नहीं नामुुमकिन हो गईं हैं। मरीजों को मजबूरी में मेडिकल स्टोरों से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही हैं।
बता दें कि 15 जुलाई 2018 को जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए थे। उस दिन दोनों अस्पतालों को अच्छी तरह सजाया गया था। विधि विधान से भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य, नगर विधायक महेश चंद्र गुप्ता और नगर पालिका चेयरमैन दीपमाला गोयल ने इनका उद्घाटन किया था। उस समय बताया गया था कि औषधि केंद्रों पर बाजार से करीब 60 से 70 फीसदी कम मूल्यों पर दवाईयां मिलेंगी। जो दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं होगी, उन्हें इन केंद्रों से खरीदा जा सकेगा। इससे माना जा रहा था कि मरीजों को कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह एक ही छत के नीचे दवाएं लेकर अच्छा इलाज करा सकेंगे। कुछ समय तक दोनों औषधि केंद्र अच्छी तरह चलते रहे। जो दवाईयां कम होती रहीं, उनकी पूर्ति भी की गई। लेकिन सात-आठ माह से पर्याप्त दवाएं नहीं मिलने से महिला अस्पताल के औषधि केंद्र में ताले पड़ गए। कुछ समय पूर्व जिला अस्पताल का औषधि केंद्र भी बंद हो गया।
कुछ दवाओं की कीमत
दवा जेनेरिक दवा मूल्य (दस गोली) बाजार मूल्य (दस गोली)
पैरासिटामॉल और आइब्रूफेन 5.50 15
पैरासिटामॉल 4.30 10
नॉरफ्लाक्स टी जेड 25.65 80
ओमेप्राजोल 7.00 70
फोलिक एसिड 18.40 42
क्या हैं जेनेरिक दवाएं
जेनेरिक दवाएं बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती हैं। गुणवत्ता में यह किसी भी प्रकार की ब्रांडेड दवाईयों से कम नहीं होतीं। यह उतनी ही असरकारक हैं, जितनी की ब्रांडेड दवाएं, यहां तक की उनकी मात्रा (डोज), साइड-इफेक्ट, सक्रिय तत्व आदि सभी ब्रांडेड दवाओं के जैसे ही होते हैं। जेनरिक दवाइयों को बाजार में उतारने का लाइसेंस मिलने से पहले गुणवत्ता मानकों की सभी सख्त प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। चूंकि इन दवाओं के प्रचार-प्रसार पर कंपनियां कुछ खर्च नहीं करती, साथ ही जेनेरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकारी अंकुश होता है, इसलिए वह सस्ती होती हैं, जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, इसलिए वह महंगी होती हैं। जन औषधि केंद्रों पर यह जेनेरिक दवाएं ही रखी जाती हैं, जिसका लाभ मरीजों को मिलता है।
जिला अस्पताल का जन औषधि केंद्र काफी समय से बंद चल रहा है। इस संबंध में मैंने संचालक ने बताया कि दवाईयां नहीं मिलने से सेंटर को बंद कर दिया गया है। संचालक जिला अस्पताल आएं तो मैं इस संबंध में बात करूं, तभी कुछ हल निकलेगा। - डॉ. बीबी पुष्कर, सीएमएस जिला अस्पताल
जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के दोनों जन औषधि केंद्र बंद हो गए हैं। इनके संचालकों ने अभी कोई सूचना नहीं दी है। उनसे लिखित में यह जवाब मांगा जाएगा कि उन्होंने औषधि केंद्र क्यों बंद किए। इसमें उनका कोई व्यक्तिगत कारण भी हो सकता है। यह तो जवाब आने के बाद ही पता चलेगा। - नवनीत कुमार, औषधि निरीक्षक