ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी है कि वे जो विकास कार्यों का पैसा मिले उसका उपयोग कर उसका हिसाब देते हुए उपभोग प्रमाण प्रमाण पत्र दाखिल करें। लेकिन अधिकारियों के कई बार आदेश पर भी प्रधान राजनीतिक संरक्षण में चुप्पी साधे हैं। पंचायतों के चुनाव आते ही एक बार फिर प्रधानों को चेताया गया है। डीपीआरओ राजेश यादव ने सभी 885 प्रधानों से उपभोग प्रमाण पत्र मांगा है। तीन दिन पहले उन्होंने सभी को इस संबंध में निर्देशों के साथ नोटिस भी जारी किए गए हैं। नोटिस पहुंचने पर प्रधानों में खलबली मची हुई है। सूत्रों के अनुसार उपभोग प्रमाण पत्र देने के लिए प्रधान और सचिवों में जंग शुरू हो गई है। प्रधान अपनी बचाने को सचिवों को उपभोग प्रमाण पत्र न दिए जाने को जिम्मेदार मान रहे हैं, सचिव प्रधान को असहयोगी करार देकर उन्हीं की जिम्मेदारी तय कर रहे हैं। इस वजह से प्रधान भी परेशान हैं। वे प्रधान सबसे अधिक परेशान हैं, जो फिर चुनाव लड़ना चाहते हैं। इन प्रधानों को बता दिया गया है कि उपभोग प्रमाण पत्र जमा नहीं किया गया, तो उनको चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध भी लग सकता है।
सभी प्रधानों को कठोरता से कहा गया है कि वे विकास कार्यों को मिले धन का उपभोग प्रमाण पत्र जमा करा दें। इसके लिए उन्होंने नोटिस जारी कर दिए हैं। जो प्रधान उपभोग प्रमाण पत्र जमा नहीं कर पाएंगे, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे।
- राजेश यादव, जिला पंचायतराज अधिकारी