नगर पालिका परिषद के उप चुनाव में चुनाव चिह्न आवंटन के साथ ही चुनावी परिदृश्य साफ हो गया है। भाजपा और सपा ने अपने अधिकृत उम्मीदवार उतारे हैं, तो कांग्रेस ने समर्थित पर दाव खेला है। बसपा ने सीधे तौर पर मैदान में उतरने से ही परहेज किया है। ये पहला चुनाव है, जब दो प्रमुख दलों से महिला उम्मीदवार आमने-सामने हैं। एक सत्ता की हनक के साथ, तो दूसरी पार्टी की विरासत के बल पर। चुनौती दोनों के सामने है। एक को सत्ता की साख कायम रखनी है, तो दूसरे को विरासत का वर्चस्व बनाए रखना है।
बदायूं नगर पालिका परिषद का उप चुनाव चेयरमैन ओमप्रकाश मथुरिया के निधन पर रिक्त हुई सीट पर हो रहा है। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े मथुरिया ने उस वक्त शहर विधायक आबिद रजा की पत्नी फातिमा रजा को शिकस्त दी थी। उप चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी, जबकि भाजपा और कांग्रेस में टिकट को लेकर ही ऊहापोह की स्थिति बनी रही। शहर विधायक आबिद रजा अपनी बेगम को पार्टी के टिकट के साथ सिंबल भी दिलाने में कामयाब रहे। भाजपा ऐनवक्त तक कंडीडेट ही तय नहीं कर पाई। करीब दो दर्जन दावेदारों के बीच दीपमाला गोयल को नामांकन के आखिरी दिन प्रत्याशी घोषित किया गया।
ये सीट भाजपा के कब्जे में थी, लिहाजा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भी है। इस विरासत को बरकरार रखने का पार्टी भरसक प्रयास करेगी। पिछले चुनाव में भाजपा अपना दमखम दिखा चुकी है। सपा की फातिमा रजा उस वक्त दूसरे नंबर पर थीं। कांग्रेस उम्मीदवार वसीम ने तीसरा स्थान हासिल किया था। हालात की बात करें, तो सूबे में उस वक्त भी सपा की सरकार थी, अब भी है। भाजपा ने तब विपरीत हालात में कमल खिलाया था, लेकिन इस बार परिणाम क्या रंग लेते हैं, यह समय ही बताएगा।
अपने पहले चुनाव में खाई है शिकस्त
बदायूं। भाजपा और सपा पिछले चुनाव के विनर-रनर रहे हैं। इस चुनाव में दोनों दलों पर ज्यादा दारोमदार है। बात सपा की करें, तो सत्ता की हनक के साथ दूसरा चुनाव लड़ रहीं फातिमा रजा पहली शिकस्त से सबक ले चुकी हैं। इस बार वह पूरी तैयारी से मैदान में उतरी हैं। भाजपा की दीपमाला गोयल का भी ये दूसरा चुनाव है। पहले भी वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं, तब उनको हार का सामना करना पड़ा था। कई दशकों से राजनीति में सक्रिय दीपमाला सियासत को बखूबी समझती हैं। दूसरे चुनाव में और परिपक्व हो चुकी हैं। गौर करने वाली बात है कि दोनों अहम दलों से दो हारी हुई महिला उम्मीदवार जीत के इरादे से मैदान में उतरी हैं।
कांग्रेस-बसपा के पास खोने को कुछ नहीं
कांग्रेस-बसपा के पास खोने को कुछ नहीं है। हालांकि कांग्रेस ने पहले महेश सक्सेना को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया, बाद में पार्टी पॉलिसी बताकर सिंबल देने से इंकार कर दिया। जिलाध्यक्ष साजिद अली के अनुसार अब सक्सेना कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार हैं।
ये हैं 10 उम्मीदवार
दीपमाला गोयल- भाजपा
फातिमा रजा- सपा
महेश सक्सेना- कांग्रेस समर्थित
मुस्तरी बेगम- निर्दलीय
मुजफ्फर निर्दलीय
डालचंद्र साहू निर्दलीय
नन्हेंलाल कश्यप निर्दलीय
वेदप्रकाश निर्दलीय
प्रदीप कुमार निर्दलीय
सरजू निर्दलीय