बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत प्रदेश सरकार की ओर से खोला गया आलू क्रय केंद्र आखिरकार बंद हो गया लेकिन एक किलो आलू भी किसी ने नहीं बेचा। केंद्र 26 दिन चला लेकिन इसमें कार्यरत कर्मचारी खाली बैठे रहे। कांटे पर कोई तुलाई नहीं हुई। आलू के लिए शासन से मानक तय होने और बाजार से रेट कम होने की वजह से किसी किसान ने केंद्र पर आलू बेचना मुनासिब नहीं समझा।
शहर में श्याम नगर स्थित एक कोल्ड स्टोर पर प्रदेश सरकार ने 12 अप्रैल को आलू क्रय केंद्र खुलवाया था। इसका संचालन उद्यान विभाग ने किया। इस केंद्र पर खरीद के लिए स्टैंडर्ड साइज और बिना कटा आलू 487 रुपये प्रति क्विंटल के रेट से खरीदना तय किया गया। करीब दो सौ से ज्यादा किसानों ने अपने खेत के आलू का मानक यहां चेक कराया, लेकिन मानक पर फिट नहीं बैठा। वहीं, मार्केट में बिना मानक आलू का रेट पांच सौ से साढ़े पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल मिला इसलिए किसानों ने केंद्र पर आलू की खरीद बिल्कुल भी नहीं हो सकी। जिला उद्यान अधिकारी आरएन वर्मा ने बताया कि सात मई को क्रय केंद्र बंद कर दिया गया। किसानों का कहना था कि बारिश की वजह से उनके खेेेतों में आलू खराब हो गया। इस वजह से भी निर्धारित मानक पर आलू खरा नहीं उतरा।