परौर क्षेत्र के मंझा घाट पर नाव से रामगंगा नदी पार करते लोग। संवाद
परौर। रामगंगा के हैदलपुर घाट पर बना पैंटून पुल लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से जर्जर हो गया है। देखरेख और मरम्मत में उदासीनता बरते जाने से पूर्वी छोर पर पुल असमतल हो गया है। इससे वहां वाहन उछल रहे हैं और उनके नदी में गिरने से कभी भी कोई हादसा हो सकता है। हैदलपुर गांव की ओर पुल का पहुंच मार्ग भी लगातार जलभराव से खस्ताहाल होकर दलदल में तब्दील हो चुका है और वहां आए दिन दोपहिया वाहन फिसलने से लोग घायल हो रहे हैं।
रामगंगा की कटरी में बसे क्षेत्र के करीब चार दर्जन गांवों के लिए आवागमन के लिए रामगंगा पर कोई पक्का पुल अब तक नहीं बनाया गया, जबकि इसकी मांग दशकों से हो रही है। जनप्रतिनिधियों के जरिये पक्के पुल की मांग शासन तक पहुंचने पर करीब तीन वर्ष पहले प्रदेश के तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने रामगंगा के हैदलपुर और बोझी घाट पर पैंटून पुल बनाने की सरकार से स्वीकृति दिलाई।
तब से दोनों घाटों पर मानसून खत्म होने के बाद पैंटून पुल बनाए जाने लगे। मानसून आने से पहले दोनों पुल हटा लिए जाने पर ग्रामीणों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है।
नियमानुसार घाट पर स्थापित होने वाले पैंटून पुलों की नियमित देखभाल भी जरूरी है, लेकिन इस ओर से लोनिवि उदासीन बना है। नतीजे में हैदलपुर घाट का पुल आवागमन के लिहाज से खतरनाक हो गया है। गांव में गंदे पानी के निकास के लिए नाले-नालियां नहीं होने से पुल का पहुंच मार्ग जलभराव से घिरा रहता है।
पानी से होकर वाहन निकलने से मार्ग पर कीचड़ से इतनी फिसलन हो गई है कि उस पर पैदल अथवा दोपहिया वाहन लेकर निकलना कठिन हो गया है। कई बाइक सवार कीचड़ में गिरकर घायल हो चुके हैं। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से पैंटून पुल और उसके पहुंच मार्ग की मरम्मत जल्द कराने की मांग की है।
000
इस संबंध में जानकारी नहीं मिली है। टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी। अगर पुल में कोई दिक्कत है तो ठीक कराया जाएगा।
-रथिन सिन्हा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
परौर क्षेत्र के मंझा घाट पर नाव से रामगंगा नदी पार करते लोग। संवाद