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तीन साल में लगातार दूसरी बार सपा के गढ़ में चित हुए धर्मेंद्र

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धर्मेंद्र यादव। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में शिकस्त के बाद सपा खेमे में मायूूसी है। बदायूं, इटावा, मैनपुुरी, आजमगढ़, रामपुर, सपा के गढ़ माने जाते हैं। 2014 में मोदी लहर के दौरान भी इन सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। 2019 के चुनाव में धर्मेंद्र यादव को बदायूं सीट पर भाजपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य ने हरा दिया था। आजमगढ़ से खुद सपा मुखिया पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सांसद चुने गए। रामपुर सीट से सपा के कद्दावर नेता मोदी-योगी लहर के दौरान चुनाव जीते।
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अखिलेश और आजम के इस्तीफे के बाद इन सीटों पर उपचुनाव हुआ तो आजमगढ़ से सपा ने अखिलेश के चचेरे भाई बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया। सपा को धर्मेंद्र की जीत का पूरा भरोसा था। आजमगढ़ सेे प्रत्याशी बनाए जाने के दौरान धर्मेंद्र ने यह भी कहा था कि वह बदायूं से कहीं नहीं जा रहे। रविवार को आए चुनाव परिणाम के बाद सपा खेमे में मायूसी है। धमेंद्र यादव 2009 में 2.33 लाख वोट पाकर बदायूं से सांसद चुने गए थे। 2014 में मोदी लहर के दौरान उनको बदायूं में रिकार्ड 4.98 लाख वोट मिले, लेकिन 2019 में सपा प्रत्याशी के रूप में 4.92 लाख वोट हासिल करने के बावजूद वह लोकसभा नहीं पहुंच सके। इससे पहले धर्मेंद्र यादव 2004 में मैनपुरी से सांसद चुने गए थे। धर्मेंद्र यादव की हार का असर जिले में आने वाले निकाय चुनावों पर भी होगा।
तीन साल में धर्मेंद्र यादव की लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी हार से सपाई मासूस हैं। उनका चुनाव लड़ाने बदायूं से बड़ी संख्या में सपाई भी आजमगढ़ गए थे। 2019 में आम चुनाव में बदायूं लोकसभा सीट पर अब आजमगढ़ लोकसभा सीट पर उपचुनाव में धर्मेंद्र की हार का असर उनकी खास के साथ आने वाले दिनों में सपा पर भी दिख सकता है। हालांकि, सपा खेमा बसपा, प्रशासन और भाजपा पर मिली भगत कर धर्मेंद्र को हरवाने का आरोप लगा रहा है। चुनाव परिणाम के बाद खुद धर्मेंद्र यादव ने भी यह आरोप लगाए हैं।
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