बदायूं। विधानसभा चुनाव में सपा-महान दल गठबंधन का जिले की राजनीति पर सीधा प्रभाव दिखा था लेकिन अब दोनो पार्टियों का गठबंधन टूट जाने के साथ राजनीतिक गलियारों में सपा की पकड़ मौर्य-शाक्य वोट बैंक पर कमजोर पड़ने की चर्चा है। हालांकि ये तो आने वाला समय ही बताएगा कि पार्टी इस वोट बैंक को कैसे अपने पक्ष में करेगी और कैसे इसकी भरपाई करेगी।
दरअसल, जिले में यादव, मुस्लिमों के साथ मौर्य, शाक्य, कुशवाह समाज का भी बड़ा वोट बैंक है। चुनाव में इस वोट बैंक का जिस ओर झुकाव होता है उसी पार्टी को जीत भी मिलती है। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के पास मौर्य, शाक्य, कुशवाह बिरादरी को साधने के लिए कोई बड़ा नेता नहीं था जबकि भाजपा के पास केशव प्रसाद मौर्य, स्वामीप्रसाद मौर्य जैसे कई चेहरे थे। इसका लाभ भी भाजपा को मिला। चुनाव में भाजपा ने जिले की छह में से पांच सीटों पर कब्जा किया।
2022 का चुनाव आने से पहले सपा ने बदायूं में यादव, मुस्लिमों के साथ मौर्य, शाक्य, कुशवाह समाज को साधने के लिए महान दल से गठबंधन किया और महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य के बेटे चंद्रप्रकाश मौर्य को बिल्सी विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया।
चुनाव में इसका फायदा भी सपा को हुआ। हालांकि सपा गठबंधन ये सीट तो नहीं निकाल सका, लेकिन भाजपा को प्रचार में पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जिले भर में कई सभाएं कीं। चंद्रप्रकाश मौर्य 68 हजार से ज्यादा वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे।
भाजपा के हरीश शाक्य ने उनको बड़े अंतर से हराया, लेकिन सपा को शेखूपुर, बिसौली, सहसवान सीट पर फायदा हुआ। दातागंज और शहर सीट पर भी भाजपा से सपा की कांटे की टक्कर रही। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि महान दल के अलग होने के बाद जिले में सपा कमजोर होगी वहीं भाजपा को मजबूती मिलेगी।