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पार्टी के प्रति वफादारी और समर्पण का उपहार मिला महेश गुप्ता को

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बदायूं। कभी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के गढ़ माने जाने वाले गुन्नौर से उन्हीं के खिलाफ चुनावी ताल ठोकने वाले सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता की पार्टी के प्रति वफादारी और समर्पण का ही नतीजा है कि उन्हें योगी सरकार में राज्यमंत्री बनने का मौका मिला। स्वभाव से सरल और अपनी सादगी से हर किसी का दिल जीतने वाले महेश गुप्ता के रूप में जिले के लोगों को 28 वर्ष बाद कोई ऐसा नेता मिल रहा है जो विधायक बनने के बाद मंत्री बना हो।
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सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता को प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री पद की जिम्मेदारी से नवाजा गया है। बुधवार को उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली, जिसके बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि उनके मंत्री बनने की चर्चा मंगलवार को ही वायरल होने लगी थी, जिसके बाद फेसबुक व अन्य सोशल साइट्स पर उन्हें बधाईयां दी जाने लगी थीं। बुधवार को जब उन्होंने शपथ ली तो यह साफ हो गया कि योगी सरकार ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया है। वर्ष 1996 में गुन्नौर से सपा मुखिया के मुलायम सिंह यादव के सामने ताल ठोकने वाले महेश गुप्ता को हालांकि उस चुनाव में जीत तो नहीं मिली लेकिन उन्होंने मुलायम सिंह के खिलाफ चुनाव लड़कर यह साबित कर दिया था कि पार्टी के आदेश पर वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस चुनाव मेें वह दूसरे स्थान पर रहे थे।
राजनीतिक समीकरण भी आए काम
जिले में पांच विधायकों में से सदर विधायक महेश गुप्ता को ही मंत्री बनाने में राजनीतिक समीकरण भी काम आए। मंडल में अभी तक सिर्फ बरेली से ही दो और शाहजहांपुर से एक सुरेश खन्ना मंत्री रहे हैं। बरेली से राजेश अग्रवाल और धर्मपाल सिंह के इस्तीफे के बाद जब मंत्रिमंडल विस्तार में नाम चुने गए तो महेश गु्प्ता का नाम इसलिए प्रमुखता से आया कि वह राजेश अग्रवाल की जगह भर सकें। वैश्य समाज में गलत संदेश न जाए, इसलिए उन्हें चुना गया। महेश गुप्ता के साथ अब तक कोई विवाद नहीं रहा है और वह ईमानदार छवि के भी रहे हैं, इसलिए उन्हें वैश्य समाज से लेते हुए सबसे उपयुक्त माना गया। दूसरा कारण यह भी रहा कि बरेली से अब कोई मंत्री योगी सरकार में न होने के कारण मंडल में कोई न कोई एक मंत्री बनाया जाना था। ऐसे में बरेली से सटे बदायूं शहर के विधायक को ही मंत्री बनाना ज्यादा बेहतर समझा गया।
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वर्ष 2017 में दूसरी बार बने थे विधायक
महेश गुप्ता ने वर्ष 2007 में विधानसभा चुनाव लड़ा और शहर सीट से विधायक बने। वर्ष 2012 में वह सपा के आबिद रजा से चुनाव हार गए लेकिन वर्ष 2017 में उन्होंने फिर से भाजपा की जीत का परचम लहराया। उनका सियासी सफर भाजपा के दहगवां के मंडल अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ था। वर्ष 1986 से 90 तक मंडल अध्यक्ष रहने के बाद 1990 से 1992 तक भाजपा के जिला मंत्री रहे। 1993 से 95 तक भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष तो 1995 से 99 तक पार्टी के जिला उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। 1999 में ही भाजपा के जिलाध्यक्ष चुने गए।
बदायूं को 28 साल बाद मिलेगा दूसरा मंत्री
बदायूं जिले में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री के ओहदे तक तो कई नेता पहुंचे, लेकिन विधायक से मंत्री बनने वाले महेश गुप्ता दूसरे ही व्यक्ति हैं। इससे पहले वर्ष 1991 में कृष्ण स्वरूप वैश्य विधायक से मंत्री बने थे। इसके अलावा गेंदनलाल वर्मा भी दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे। वर्तमान में बीएल वर्मा दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हैं।
ठेठ गंवई भाषा में जोड़ लेते हैं जनता से रिश्ता
मंत्री बने महेश गुप्ता की सादगी और सरलता का ही नतीजा है कि वह जहां भी जाते हैं वहां की जनता से एक रिश्ता जोड़ लेते हैं। उनकी यह खासियत ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई देती है। देहात में जाने पर वह लोगों से वैसी ही भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की जनता उनसे अपनापन महसूस करती है। और तो और, हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने सांसद संघमित्रा मौर्य के चुनाव में मंच से भी ठेठ गंवई भाषा का प्रयोग कर जनता से सीधा रिश्ता जोड़ लिया। उनकी इस अदा की जनता ने भी बेहद तारीफ की।
बदायूं के लोगों का प्यार और विश्वास ही है जिसकी खातिर आज मुझे यह जिम्मेदारी दी गई है। जिले की तरक्की और आमजन की समस्याओं का निराकरण ही प्राथमिकता होगी। किसानों के लिए नदियां जीवन दायिनी हैं। सोत नदी के पुनर्जीवन के लिए पहले से ही प्रयासरत रहे हैं। अब और मजबूती से इसके प्रयास किए जाएंगे। लंबे समय से बाईपास पर सोत नदी की पुलिया बनने का भी अवरोध दूर हो गया है। आगे जनहित से जुड़े जितने भी मुद्दे हैं उनके लिए दिन रात लोगों के लिए हाजिर रहेंगे। मंत्री नहीं जनता का सेवक बनकर कार्य करेंगे। -महेश गुप्ता, सदर विधायक एवं राज्यमंत्री
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