बदायूं। जिले में 2007 के चुनाव में ज्यादातर सीटों पर परचम लहराने वाली बसपा का हाथी बाद के सभी चुनावों में सुस्त होता जा रहा है। पिछले चुनाव के मुकाबले ही इस बार करीब एक तिहाई से ज्यादा वोट कम पड़े। मुसलमानों के अलावा दूसरे वर्गों ने भी पार्टी का पहले जैसा साथ नहीं दिया। जिससे रही सही चमक भी जाती रही।
बसपा का जिले में मजबूत आधार रहा है। वर्ष 2007 में जिले में सदर सीट पर भाजपा के अलावा बाकी सीटों पर बसपा का कब्जा रहा। सहसवान व बिसौली सीटें रापद ने जीती थीं पर बसपा सरकार में डीपी यादव व उनकी पत्नी उमलेश यादव शामिल हो गए। इस तरह पूरा जिला बसपामय हो गया था। उन दिनों जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर नगर निकायों की तमाम सीटें बसपा के पास रहीं। बाद के वर्षों में बसपा का जनाधार जिले में कम होता चला गया। हालांकि बिल्सी से हाजी बिट्टन ने वर्ष 2012 में चुनाव जीतकर बसपा का वजूद कायम रखा।
इस चुनाव में बसपा की स्थिति काफी ढुलमुल नजर आई है। वर्ष 2017 में जिले में बसपा को कुल वोट 311061 मिले जो इस बार 202802 ही रह गए। हर सीट पर बसपा का वोट प्रतिशत अप्रत्याशित रूप से गिरता नजर आया। इनमें सदर सीट पर जहां बसपा को 2017 में 32621 वोट मिले वहीं इस बार 23002 वोट ही मिले। इसी तरह बिल्सी में 55091 वोट के सापेक्ष इस साल 31604 वोट ही मिले हैं। बिसौली में पिछले विधानसभा चुनाव में 32399 वोट मिले जो इस बार 23414 ही रह गए। दातागंज में बसपा का ये आंकड़ा पिछले वोट 53351 की सापेक्ष 20554 पर आकर ही सिमट गया। शेखूपुर में पिछली बार 64325 वोट मिले जो इस बार 34801 ही रह गए। इन सभी जगह बसपा तीसरे नंबर की पार्टी रही। सहसवान में जरूर बसपा दूसरे नंबर पर रही पर वोट का आंकड़ा वहां भी गिर गया। बिल्सी विधायक रहे हाजी बिट्टन को यहां इस बार 69427 वोट मिले हैं जबकि 2017 के चुनाव में बिट्टन के नाम पर ही उनके भाई अरशद अली को बसपा प्रत्याशी रहते 73274 वोट मिल गए थे। चुनावी रणनीतिकार मान रहे हैं कि बड़े नेताओं की चुनाव से दूरी, मुसलमानों का पार्टी से मोहभंग होने की वजह से बसपा का प्रदर्शन लगातार खराब होता जा रहा है। संवाद