बदायूं। शहर से सटी शेखूपुर विधानसभा सीट फिलहाल त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी नजर आ रही है। यहां भी मुस्लिम वोटरों की गोलबंदी पर प्रत्याशियों का भविष्य टिका है। मौजूदा विधायक भाजपा के धर्मेंद्र शाक्य अपनी जीत दोहराने में जुटे हैं तो सपा के युवा प्रत्याशी हिमांशु यादव और पुराने दिग्गज बसपा के मुस्लिम खां उन्हें सियासी पटखनी देने का मन बनाकर जीजान से जुटे हैं।
दस बरस पहले ही अस्तित्व में आए शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में भी चुनावी हलचल तेज हो गई हैं। वोटर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं पर अपने पसंदीदा प्रत्याशी को वोट देने का मन बना चुके हैं। फिलहाल की स्थिति में वहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार नजर आ रहे हैं। भाजपा के धर्मेंद्र शाक्य परंपरागत वोटों के साथ ही सजातीय मौर्य-शाक्य मतदाताओं के भरोसे जीत के प्रति आश्वस्त हैं। वह मानकर चल रहे हैं कि सर्व समाज का वोट उनके पक्ष में है, यहां तक कि करीबी मुस्लिम वोटर भी साथ हैं। वहीं पूर्व विधायक आशीष यादव के बेटे हिमांशु पहली बार चुनावी समर में मजबूती से डटे हैं। बेस वोट यादव-मुस्लिम वोटरों के साथ वह भी दूसरे समाज के वोट मिलने को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। कांग्रेस से टिकट लेकर उसे लौटाने वाली फरहा नईम भी उन्हीं का समर्थन करती नजर आ रहीं हैं।
हिमांशु की जीत की डगर में सबसे बड़ा कांटा सपा के ही बागी आबिद रजा बने हैं। सपा के दूसरे बागी मुस्लिम खां ऐन वक्त पर जाकर बसपा का टिकट लेकर चुनावी समर में कूद पड़े हैं। शेखूपुर सीट मुस्लिम बाहुल्य मानी जाती है। मुस्लिम खां का इस वोट बैंक से जुड़ाव है ही। खुद को सपा विरोधी राजनीति का स्टार प्रचारक घोषित कर चुके आबिद रजा भी यहां मुस्लिम खां के साथ आ गए हैं और खुलकर सभाएं कर रहे हैं। मुस्लिम खां को बसपा के कैडर वोट पर भी भरोसा है। ऐसे में उन्हें कमजोर नहीं आंका जा सकता।
कांग्रेस की प्रत्याशी ममता प्रजापति भी क्षेत्र में सभाएं व जनसंपर्क करके अपनी जीत का दावा कर रहीं हैं। शेखूपुर विधानसभा में जनसेवा सहायक पार्टी से मोहर सिंह, आम आदमी पार्टी से रियासत पार्टी, आजाद समाज पार्टी से अवनेश कुमार, विकासशील इंसाफ पार्टी से सुनील कुमार, बहुजन मुक्ति पार्टी से रविंद्र कुमार सिंह, भारतीय सुभाष सेना से कुंवरपाल व निर्दलीय शाहिद अली भी चुनावी मैदान में डटे हैं।
कुल मतदाता- 402701
पुरुष -215417
महिलाएं- 187276
थर्ड जेंडर- 08
जातिगत मतदाता मुस्लिम -100921
यादव - 67 हजार मौर्य शाक्य - 66 हजार कश्यप- 30 हजार
लोधे राजपूत- 26 हजार
कुर्मी- 10 हजार ठाकुर- 13 हजार ब्राह्मण- 14 हजार वाल्मीकि- 6 हजार धोबी- 8 हजार खटीक- 1500
नाई- 1800 कुम्हार- 2000 साहू- 3000 पाली- 9000वैश्य- 7000 कायस्थ- 3000 अन्य 33542
(सभी आंकड़े लगभग में हैं)
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प्रमुख मुद्दे
- कादरचौक को नगर पंचायत का दर्जा
- फायर स्टेशन
- रोडवेज बस स्टैंड
- आईटीआई कॉलेज
- ककोड़ा मेला को राजकीय घोषित करने की मांग
- राजकीय डिग्री कालेज
- सहकारी चीनी मिल की क्षमता बढ़ाना
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दो खानदानों के सियासी द्वंद्व का केंद्र रहा है विधानसभा क्षेत्र
साल 2008 में परिसीमन के बाद शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र बना। उस समय तक यह उसहैत विधानसभा के नाम से पहचानी जाती थी। उसहैत के साथ ही बिनावर विधानसभा क्षेत्र भी खत्म किया गया और बिनावर का कुछ हिस्सा भी नवसृजित शेखूपुर में शामिल हुआ। तब उसहैत विधायक बसपा से हाजी मुस्लिम खां थे। शेखूपुर विधानसभा से 2012 के चुनाव में पहले विधायक सपा से आशीष यादव बने जिन्होंने पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य को हरा दिया जो कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे। आशीष पूर्व राज्यमंत्री बनवारी सिंह यादव के बेटे हैं जो इससे पहले उसहैत से सपा के विधायक रह चुके थे। वर्ष 2017 का चुनाव भगवान सिंह शाक्य के बेटे धर्मेंद्र शाक्य ने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर सपा के आशीष यादव को हराकर जीत लिया।
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प्रभावशाली नेता बनवारी सिंह और भगवान सिंह में होता रहा मुकाबला
मुस्लिम खां के कार्यकाल को छोड़कर बाकी समय उसहैत व शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में स्व. बनवारी सिंह यादव और धर्मेंद्र शाक्य के पिता भगवान सिंह शाक्य की राजनीतिक पकड़ बनी रही। बनवारी सिंह यादव कोऑपरेटिव सोसाइटी की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए तो किसान परिवार के भगवान सिंह शाक्य उनसे सियासी मुकाबला करते रहे। दोनों ने ही अपनी राजनीतिक विरासत बेटों को दी और अब आशीष यादव ने अपने पुत्र हिमांशु यादव को विरासत सौंप दी है।
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वोटरों को सहूलियत की दरकार, महिलाएं परिवार की समझ के सहारे
शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र के इलाकों में घूमकर हमने चुनावी मिजाज का जायजा लिया तो अलग-अलग तरह की स्थितियां देखने को मिलीं। इलाके का मुख्यालय शेखूपुर गांव जैसा है। हालांकि पिछले कुछ साल में यहां सड़क, बिजली पानी जैसी सहूलियतें बढ़ी हैं पर विधानसभा मुख्यालय के बाशिंदे इन्हें नाकाफी मानते हैं। शेखूपुर निवासी योगेंद्र पाल गोले का कहना था कि गांव में पानी की टंकी काफी नीची जगह बनी है। इससे शेखूपुर के अस्सी फीसदी घरों में पानी नहीं आता। इसी तरह ढलान पर बना अस्पताल भी उन लोगों के लिए बेमतलब साबित होता है। यहां रविंद्र कुमार शर्मा ने बात काटी और कहा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज गांव के पास बना होने से काफी सहूलियत हुई है। गंभीर रोगों का इलाज भी लोगों को वक्त पर मिल जाता है। माजिद अली ने बेरोजगारी का रोना रोया। कहा कि जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो लोगों को रोजगार से जोड़ने का काम करे। कोरोना काल में बढ़ी बेरोजगारी का सिलसिला लंबा हो गया है जो भविष्य में अपराध बढ़ने की वजह बन सकता है। ककराला कस्बे में मोहम्मद नबी से बात हुई तो उनका कहना था कि ककराला को फलपट्टी घोषित किया गया है पर अमरूद की खेती को बढ़ावा देने के लिए कोई खास काम नहीं हुआ। बदायूं शहर की आवास विकास कॉलोनी भी शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां के निवासी दिलीप कुमार कहना था कि उनकी कॉलोनी की बदहाली को दूर कराने वाले को ही वोट देंगे। गनूपुरा गांव की विद्यावती और दुलारी देवी का कहना था कि घर के पुरुष जहां कहेंगे, उसी चुनाव चिह्न पर वोट देंगे। संवाद