बदायूं। जिले की राजनीति में 80 के दशक तक छोटे राजनीतिक दलों का खासा असर था। इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ इन दलों का असर 90 के दशक तक बना रहा। बाद में भाजपा, बसपा और सपा जैसे दलों के सामने छोटे दलों का असर धीरे-धीरे कम होता गया। निर्दलीयों की बात करें तो बिसौली विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने 1977 और 1985 में दरियादिली दिखाई। दोनों बार निर्दलीय प्रत्याशियों को विधानसभा भेजने का काम किया।
जिले में लोकदल, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी, जनता दल, जनता पार्टी के प्रत्याशी भी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। सहसवान विधानसभा सीट से 1977 में जनता पार्टी और 1985 में लोकदल से नरेशपाल सिंह विधायक चुने गए। 1991 में ओमकार सिंह यादव जनता दल के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे।
2007 में राष्ट्रीय परिवर्तन दल के मुखिया डीपी यादव इस सीट से विधायक चुने गए। 1974 में बिनावर सीट से भारतीय क्रांति दल के प्रत्याशी के रूप में असरार अहमद चुनाव जीते। 1985 में लोकदल के प्रत्याशी राम स्वरूप इस सीट पर दूसरे स्थान पर रहे।
2007 में राम सेवक सिंह पटेल भारतीय जन शक्ति पार्टी से मैदान में उतरे और विधायक चुने गए।
बिल्सी सीट से 1974 में भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे सोहनलाल विधायक चुने गए। 1977 में जनता पार्टी के सोनपाल पिप्पल और 1989 में जनता दल के दौलतराम यहां से विधायक चुने गए। इसके बाद बिल्सी सीट पर भाजपा, सपा और बसपा के ही विधायक चुने जाते रहे। बिसौली सीट से 1974 में भारतीय क्रांति दल के कृष्णवीर सिंह विधायक चुने गए। 1977 में ब्रजबल्लभ निर्दलीय और 1985 में योगेंद्र कुमार यहां से निर्दलीय विधायक चुने गए। इस सीट पर 1991 में जनता दल के कृष्णवीर सिंह ने कब्जा किया और 2007 में राष्ट्रीय परिवर्तन दल की उमलेश यादव विधायक चुनीं गईं। उसहैत सीट से भारतीय जनसंघ के ब्रजपाल 1974, जनता पार्टी से भगवान सिंह 1977 में चुनाव जीते। जनता दल से भगवान सिंह 1998 में फिर विधानसभा पहुंचे। शहर विधानसभा सीट पर 1977 में जनता पार्टी से कृष्ण स्वरूप वैश्य विधायक चुने गए। दातागंज सीट पर 1977 में जनता पार्टी के ही अवनीश कुमार सिंह विधायक चुने गए। इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा, सपा और बसपा के अलावा अन्य दलों का खास प्रभाव नहीं रहा।
जिले में 90 का दशक खत्म होते-होते छोटे राजनीतिक दलों का मत प्रतिशत गिरता गया। यह दल अब चुनाव मैदान में भी नजर नहीं आते। केवल डीपी यादव का राष्ट्रीय परिवर्तन दल ही चार सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। बिसौली सीट को छोड़ दें तो अब तक किसी अन्य सीट से चुनाव जीत कर कोई निर्दलीय विधानसभा पहुंचने में कामयाब नहीं हो सका है। संवाद