बदायूं। भारत करीब छह साल पहले पोलियो मुक्त हो चुका है। लंबे अरसे के बाद स्वास्थ्य विभाग के सामने एक ऐसा केस आया जिसमें पोलियो जैसे लक्षण मिले हैं। तेज बुखार आने के बाद एक दो साल के बच्चे के दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया। स्वास्थ्य विभाग के सामने जब मामला पहुंचा तो हड़कंप मच गया। डॉक्टरों ने भी बच्चे में पोलियो जैसे लक्षण होने की बात कही है। हालांकि पुष्टि के लिए स्टूल सैंपल लेकर जांच को भेजे गए हैं। वहीं जिला अस्पताल में बच्चे का इलाज शुरू कर दिया गया है।
कारदचौक ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम मल्लामई में किशन लाल के दो साल के बेटे अभिषेक को पंद्रह दिन से तेज बुखार आ रहा था। घर वालों के अनुसार तेज बुखार के बाद उनका बेटा अपने पैरों पर सही खड़ा नहीं हो सका। उसके दोनों पैर लुंजपुंज हो गए। परिवार वाले बच्चे को लेकर उझानी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां बच्चे में पोलियो जैसे लक्षण बताए गए। परिजन बच्चे को कादरचौक के स्वास्थ्य केंद्र भी ले गए और डॉक्टरों को दिखाया। स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में मामला आया तो हड़कंप मच गया। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की एक टीम उनके गांव पहुंची थी। फिर बच्चे का चेकअप किया, साथ ही उन्हें बच्चे को जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इधर, मंगलवार को परिवार वाले बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल में पहले ही मौजूद डब्ल्यूएचओ की टीम ने बच्चे को देखा। डॉ. गुंजन कुमार ने बताया कि बच्चे के दोनों पैर काम नहीं कर रहे हैं। उसका इलाज शुरू कर दिया है। स्टूल सैंपल लेकर जांच को भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ होगी और उचित इलाज किया जाएगा।
पहले भी सामने आ चुके हैं कई संदिग्ध केस
-विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आधिकारिक तौर पर 27 मार्च 2014 को भारत पोलियो मुक्त घोषित कर दिया था। उस दिन भारत समेत करीब 11 देश पोलियो मुक्त किए गए थे। इसके बावजूद आसपास के कुछ देशों में पोलियो के केस निकले हैं। इससे आज भी भारत में पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। संचारी रोग प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता के अनुसार जिनके हाथ पैर अचानक काम करना बंद कर देते हैं, ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं। इन्हें एएफपी (एक्यूट फ्लैसिड पैरालाइसिस) कहते हैं। हालांकि इस बच्चे में पोलिया का वायरस है या एएफपी या अन्य कोई समस्या वो जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
हम तो हर 15 साल तक के बच्चे को सर्विलांस कर रहे हैं। चाहे फिर उसे काली खांसी हो या उसके हाथ पैर लुंजपुंज हों। हम उनके सभी टेस्ट कराते हैं। उसके बाद उनका उपचार किया जाता है। हमने कादरचौक के बच्चे को संज्ञान में ले लिया है। उसका बाल रोग विशेषज्ञ से इलाज कराया जा रहा है।
डॉ. अनिल शर्मा, प्रभारी सीएमओ
ये बच्चा कल स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। बच्चा संदिग्ध लगा तो उसकी सैंपलिंग आदि कराई गई, फिर फॉर्म भरके बदायूं भेज दिया गया है। उसके पैरों ने काम करने बंद कर दिया था। हम ऐसे बच्चों को पोलियो की तरह ट्रीट कर रहे हैं। इसकी एक माह बाद रिपोर्ट आएगी, तभी पता चलेगा कि उसमें पोलियो है या नहीं। उसको सारे टीके लग चुके हैं।
डॉ. इमरान, एमओआईसी कादरचौक