दातागंज (बदायूं)। हजरतपुर थाना क्षेत्र में जान से मारने की नीयत से किए हमले में नामजदों की गिरफ्तारी करने गांव दियौचरी पहुंची पुलिस टीम पर आरोपियों के परिजनों ने हमला कर दिया। हमले में उपनिरीक्षक नवरतन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर में चोट आने के बाद पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट, धमकी समेत विभिन्न धाराओं में सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, जून में गांव दियौचरी निवासी नेमपाल की बेटी सुचि ने दुर्गपाल, उमेश, अजयपाल, रमेश, धर्मपाल, अवनीश और रजनेश को नामजद करते हुए पिता के साथ मारपीट का केस दर्ज कराया था। इन्हीं सातों नामजद आरोपियों की तलाश में उपनिरीक्षक नवरतन सिंह, सिपाही संदीप और मनीश के साथ शुक्रवार रात 2:30 बजे गांव में पहुंचे थे।
पुलिस टीम की ओर से दिए गए नोटिस को भी आरोपियों के परिजनों ने उनके सामने ही फाड़ डाला। गाली-गलौज करते हुए दरोगा के सिर पर जान से मारने की नीयत से राॅड से हमला कर दिया। इससे उनके शरीर में कई चोटें आईं। उनके हमराही को भी लाठी-डंडों से मारा। थाना पहुंचने पर दरोगा और घायल सिपाहियों को उपचार के लिए सीएचसी ले जाया गया। उधर, पुलिस ने इस हमले की रिपोर्ट अजयपाल, धर्मपाल, अवनीश, रजनेश, हरपाल, शिवनीश और बंटू के खिलाफ दर्ज कराई है।
दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमला और सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले सातों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। - अभिषेक कुमार सिंह, एसपी सिटी
हत्या के केस में आरोपी जमानत पर लौटा और फिर बढ़ता गया दबदबा
- 20-22 साल की उम्र में परिवार में हत्या के आरोप में गया था जेल
- हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा होकर गांव में रह रहा था आरोपी
रतन सिंह गुर्जर
बदायूं। हजरतपुर थाना क्षेत्र में शनिवार रात पुलिस टीम पर हमले के मामले में नामजद अजयपाल का आपराधिक इतिहास भी चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्तमान में पुलिस टीम पर हमले और जान से मारने की नीयत से हमले में नामजद आरोपी अजयपाल हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा होकर गांव में रह रहा है।
आरोपी अजयपाल को करीब 20-22 वर्ष की उम्र में अपने ही परिवार के एक सदस्य की गोली मारकर हत्या करने के मामले में जेल जा चुका है। उस प्रकरण में वह लंबे समय तक न्यायिक अभिरक्षा में रहा। वर्तमान में हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा होकर गांव में रह रहा है। जेल से बाहर आने के बाद अजयपाल ने गांव में फिर से अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया।
इसके साथ ही वह स्थानीय राजनीति से भी जुड़ गया। इससे उसका सामाजिक और राजनीतिक दखल बढ़ा। इसी कारण उसके खिलाफ खुलकर शिकायत करने से भी लोग कतराते रहे। जून में दर्ज केस में नामजद होने के बावजूद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। इसी बीच उसके परिवार के लोगों का भी मनोबल बढ़ता गया।
शुक्रवार को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने गई पुलिस टीम पर भी आरोपियों और उनके परिजनों ने हमला कर दिया। इसके बाद से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। गांव में पुलिस की टीमें लगातार तैनात है। संवाद
जून में पुलिस के सामने हुई थी नेमपाल की पिटाई
- अगर तभी पुलिस सख्ती बरतती तो शायद न होता यह हमला
मुन्ना लाल गुप्ता
दातागंज। हजरतपुर थाना क्षेत्र में पुलिस टीम पर हुए हमले के बाद एक माह पुराना घटनाक्रम फिर चर्चा में आ गया है। आरोपी अजयपाल चार भाई (हरपाल, धर्मपाल, दुर्गपाल और नेमपाल) हैं। इसमें नेमपाल अपने सभी भाइयों से अलग रहता है। 13 जून को नेमपाल के घर का रास्ता दुर्गपाल ने बंद कर दिया। इसको लेकर भी विवाद हो रहा था। इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
पुलिस टीम के मौके पर पहुंचने पर भी पुलिस के सामने ही दुर्गपाल और अजयपाल के लड़कों ने नेमपाल के साथ मारपीट की। मारपीट में नेमपाल बेहोश होकर गिर पड़ा। इस घटना के बाद नेमपाल गांव छोड़कर अपनी ससुराल गांव रजनापुर, फरीदपुर जनपद बरेली में रहने लगा था। नेमपाल की बेटी की ओर से दर्ज केस में दुर्गपाल, उमेश, अजयपाल, रमेश, धर्मपाल, अवनीश और रजनेश को नामजद करते हुए पिता के साथ मारपीट का केस दर्ज कराया था।
जून में पुलिस के सामने आरोपियों ने नेमपाल के साथ मारपीट की। पुलिस के मौके पर मौजूद होने के बावजूद कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई। यदि उसी समय हमलावरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होती, उन्हें गिरफ्तार किया जाता और कानून का प्रभावी संदेश जाता, तो आरोपियों का मनोबल इतना नहीं बढ़ता। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि कथित ढिलाई का ही परिणाम रहा कि बाद में जब पुलिस आरोपियों को पकड़ने पहुंची तो उसी टीम पर हमला कर दिया गया। संवाद
पुलिस टीम पर हमले में घायल दरोगा नवरतन सिंह अस्पताल में उपचार कराते हुए। स्त्रोत वीडियोग्रैब