अचौरा में नए धर्मस्थल को लेकर पथराव और फायरिंग के तीसरे दिन रविवार को भी दहशत का माहौल नजर आया। जहां धर्मस्थल बनाने की कोशिश की गई, वह भूमि किसकी है? इसके लिए पुलिस ने राजस्व कर्मियों के जरिए रिकार्ड भी खंगालना शुरू कर दिया है। उधर, पकड़े जाने के डर अधिकतर ग्रामीण अभी तक घर नहीं लौटे हैं।
कोतवाली क्षेत्र के गांव अचौरा में स्कूल की चहारदीवारी के अंदर पिलर खड़े करके उसे धर्मस्थल के रूप में परिवर्तित किए जाने की कोशिश में बवाल के बाद पुलिस ने रविवार को चौकसी बरकरार रखी। पीएसी के साथ कोतवाली का फोर्स भी गांव में कैंप किए हुए है। दरोगा जितेंद्र सिंह पूरे दिन गांव में ही रहे। उन्होंने पीएसी का अस्थायी ठहराव विवादित स्थल के समीप करा दिया है। कोतवाल देवराज राठी ने गलियारों में गश्त की। बताया कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है। महिलाओं को भी समझाकर किसी तरह की अफवाह से विचलित नहीं होने की सलाह दी गई है।
अचौरा में पथराव और फायरिंग के बाद दोनों समुदाय के अधिकतर पुरुष सदस्य नाते-रिश्तेदारियों में खिसक गए थे, लेकिन वह अभी तक घर नहीं लौटे हैं। गांव की एक महिला ने बताया कि घरवाले फिलहाल लौटे, तो उन्हें पुलिस गिरफ्तार कर लेगी। पुलिस ने 40 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की थी। इनमें 35 को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है। करीब 60 अज्ञात उपद्रवियों के नाम सूचीबद्ध करने में भी पुलिस जुटी है। सूत्रों की मानें तो कोतवाली पुलिस ने ऐसे लोगों की गिरफ्तारी को रणनीति भी तय कर ली है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि नये धर्मस्थल के स्वामित्व का रिकार्ड खंगाल लिया गया है। अब तक यह भी सामने आ चुका है कि जहां स्कूल संचालित है, उसकी मान्यता भी नहीं है।
शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई तय
उझानी। अचौरा के बवाल के मामले में पुलिस ने दोनों पक्ष के जिन 48 लोगों को नामजद किया है, उनमें एक ग्रामीण के नाम शस्त्र का लाइसेंस भी है। उसका नाम भी पुलिस को पता है। माना जा रहा है कि पुलिस एक-दो दिन में शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई कर देगी। संभव तो काफी हद तक यह भी है कि पुलिस धर्मस्थल की भूमि को लेकर 145 की कार्रवाई कर सकती है।
अचौरा में अब तनाव का माहौल नहीं है। नामजद रिपोर्ट और शांति व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस के स्तर से जो भी कार्रवाई तर्कसंगत होगी, उसे किया जाएगा। अफवाह फैलाने वाले भी नहीं बख्शे जाएंगे। - देवराज राठी, प्रभारी निरीक्षक।