बदायूं। विभिन्न थाना क्षेत्रों में झगड़ा कर शांति व्यवस्था बिगाड़ने के मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत लोगों के विरुद्ध दर्ज मामलों में पुलिस साक्ष्य नहीं दे सकी। न ही पुलिस की ओर से ठोस पैरवी की गई। अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई करने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट सुमित कुमार सिंह की कोर्ट ने नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत दर्ज 80 मामलों के केस खारिज कर दिए। फाइलों को दाखिल दफ्तर कराने के आदेश जारी कर दिए।
सिविल लाइंस, कोतवाली आदि थाना क्षेत्रों में सालभर में झगड़ा कर माहौल बिगाड़ने के मामलों में बड़ी संख्या में लोगों के विरुद्ध नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत धारा 2023 में कार्रवाई की गयी। थानों की पुलिस ने सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोपियों को पेश किया, जहां से उन्हें उस समय जमानत मिल गई। इसके बाद नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा में वाद दर्ज कर सुनवाई शुरू हुई।
इधर, सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 25 जुलाई, 27 जुलाई और 28 जुलाई को करीब 80 मामलों की सुनवाई की। कोर्ट ने सभी मामलों में दिए आदेश में कहा है कि पत्रावली पेश हुई। पुकार कराने पर विपक्षी अनुपस्थित थे। अभियोजन पक्ष की ओर से कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। पत्रावली का अवलोकन किया। वाद की कार्रवाई पुलिस आख्या के आधार पर विचाराधीन थी लेकिन इस अवधि में अभियोजन पक्ष की ओर से न तो कोई पैरवी की गई और न ही विपक्षियों के विरुद्ध साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी/साक्ष्य के अभाव में वाद कार्रवाई समाप्त कर दी।