मुख्य फसलें मौसम की मार में बर्बाद होने के बाद पालेज फसलों ने किसानों को कुछ राहत दी है। जिले में गंगा, रामगंगा, अरिल, सोत महावा आदि नदियां बहती हैं। कुछ नदियां सूख जरूर चुकी हैं, लेकिन इनके किनारे पालेज की फसलें होती हैं। जायद की फसलों में शुमार पॉलेजी फसलों में प्रमुख रूप से तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा की फसलें शामिल हैं। इन फसलों के लिए इस बार मौसम अनुकूल रहा। इससे किसानों को लाभ हुआ है।
इस बार रबी की फसल और उससे पहले खरीफ की फसल में किसानों को मौसम ने मात दी। किसान की तो मानों कमर ही तोड़ दी। खरीफ की फसल को सूखा ने तो रबी की फसल को अतिवृष्टि और ओला वृष्टि ने बर्बाद कर दिया। किसानों ने आत्महत्याएं कीं। आर्थिक रूप से टूटे किसानों को अगर राहत मिली तो नदियों के किनारे जायद की फसलों के ठीक-ठाक हो जाने से मिली। जिले में करीब 70 हजार हेक्टेयर में यह फसल होती है। पॉलेज के नाम से पान रखने वाली जायद की फसलों में तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि शामिल हैं।
नदियों फाट इस जिले में पॉलेज को हैं वरदान
प्रमुख गंगा नदी, रामगंगा, महावा, अरिल, महावा, सोत जैसी नदियों के किनारे जायद की फसल को वरदान हैं। इनके फाटों में कोई और फसल नहीं होती, केवल पॉलेज होती है। जिले में किसान जब हर ओर से निराश था तो जायद की फसल ने उसे राहत दी।
कई प्रांतों में जाता है बदायूं का तरबूज खरबूजा
बदायूं की नदियों के किनारे पैदा होने वाले तरबूज, खरबूजा, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा तक जाता है। इस बार जायद की फसलों का राजा तरबूज कई प्रांतो में भेज किसानों ने इस फसल से अच्छा मुनाफा लिया। जिले की मंडियों में भी इन फसलों की अच्छी कीमत मिली।
नहीं मिलती जायद की फसल को प्राथमिकता
जिले में जायद की फसल पर किसान काफी निर्भर रहते हैं। यह फसल नदी किनारे किसानों को भाग्य बदलने वाली फसल है लेकिन शासन प्रशासन इस फसल पर किसानों को कोई खास प्रोत्साहन नहीं देता। खरीफ गोष्ठी और रबी गोष्ठी तो की जाती हैं लेकिन जायद गोष्ठी नहीं होती।
क्या कहते हैं जायद की फसल करने वाले किसान
कादरचौक क्षेत्र के ककोड़ा निवासी जयपाल का कहना है कि तरबूज और खरबूजा की अच्छी फसल हो जाने के कारण किसान ने कुछ राहत जरूर महसूस की है, लेकिन रबी और पिछली खरीफ की फसल के नुकसान से तो बड़ा झटका दिया है।
उझानी बलाक क्षेत्र के गांव पिपरौल निवासी पप्पू का कहना है कि गांव में पॉलेज से किसान अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक लाभ में रहता है। यह फसल जायद की प्रमुख फसलों में है। इस बार मौसम की मार से केवल यही फसल बची। बाकी फसलों ने तो किसान की आर्थिक स्थिति ही बिगाड़कर रख दी थी।
जायद की फसल करने वाले किसानों की इस बार लाभ हुआ है। अपने जिले में जायद की फसलें नदियों के किनारे होती हैं। इसबार जब अन्य फसलें बर्बाद हो गर्ईं अकेले जायद की फसल ने किसानों को लाभ पहुंचाया।
-आरके सिंह, जिला कृषि अधिकारी