अटल ने सुनाया ‘चिंतन चिंता में बदल गया’ मन निर्वासन को मचल गया। हम जीना सीख सके जब तक, जीवन हाथों से निकल गया। कवि भारत शर्मा राज ने कहा कि ‘निकरै खुंस पुरानी भैया, बुरी बला पिरधानी भैया। गजलकार कुमार आशीष ने कहा कि उगा करती थी सोने की फसल किस्से कहानी में। कवि भूराज ने कहा कि वही सांचे वहीं खांचे ढले तुम भी, ढले हम भी। कवि षटवदन ने कहा कि मेरी बिटिया रानी तू है मेरी बिटिया रानी। एक नई तेरे जीवन से जुड़ती नई कहानी।
इसके साथ ही साहित्यकार चंद्रपाल सिंह सरल, महेश मित्र, सचिव भानुप्रकाश भानु, प्यारे सिंह शिशु विशाल गाफिल विनोद सक्सेना बिन्नी अनंगपाल सिंह तोमर, डॉ. अरविंद धवल, ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा, पूर्व डीजीसी जवाहर सिंह, राकेश गुप्ता, विवेक यादव, अमित चौधरी, रनवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
यादों का ये झंझावत, विरहा की काली रात...
बदायूं। आजाद हिंद वाहिनी छात्र संगठन की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवि श्याम सुंदर ने कहा कि यादों का ये झंझावत, विरहा की काली रात, कारे-कारे बदरा की भांति मंडरावै हैं।
इस दौरान जमुर्रद शायर, ताहिर हुसैन, डॉ. कांता शर्मा, प्रमोद शर्मा ने भी काव्यपाठ किया। इस दौरान संजीव कुमार, अरविंद वर्मा, साहिल, नीलेश मोहित, सचिन, दिनेश राठौर, संगीता, विनीता, सुमन, राजवीर आदि मौजूद रहे।