बिसौली में शायर फहमी बदायूंनी के जनाजे को ले जाते लोग। संवाद
बिसौली। विश्व में भारत का नाम रोशन करने वाले मशहूर शायर पुत्तन खां फहमी बदायूंनी के शव को सोमवार को कस्बे के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके निधन पर दुनिया भर के साहित्यकारों ने दुख जताया है।
सोमवार को पहले ईदगाह रोड पर नमाज एक जनाजा अदा कराई गई। ईदगाह रोड के पास उनके खानदानी कब्रिस्तान में अपराह्न करीब दो बजे उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जाने-माने शायर और कवि उनके जनाजे में शामिल हुए। वहीं, बेटे जावेद ने पिता की कब्र को मिट्टी दी, लेकिन दूसरा बेटा नावेद विदेश से नहीं आ सका। वह रूस में है।
कस्बे के डॉ. अमरूदीन ने बताया कि फहमी कई-कई घंटे उनकी क्लिनिक पर बैठकर शायरी सिखाया करते थे। उनके छोड़कर जाने से पूरी दुनिया में उन्हें सुनने वाले दुखी हैं। शायर अभीक्ष पाठक बताते हैं शायरी की दुनिया में फहमी बदायूंनी से उनका पिछले 20 वर्षों से गहरा जुड़ाव रहा। बहुत कुछ उनसे सीखने को मिला। फहमी की याद में शायर श्रीदत्त शर्मा ने नम आंखों से फहमी साहब की सबसे पहले चर्चित हुई शायरी पढ़ी- प्यासे बच्चे पूछ रहे हैं, मछली-मछली कितना पानी, छत का हाल बता देता है, पतनालों से बहता पानी। खालिद बताते हैं फहमी साहब दो-चार शब्दों में पूरी बात कह दिया करते थे। उनके लफ्ज दिल पर असर किया करते थे। यही उनकी खूबी थी।
बिसौली में शायर फहमी बदायूंनी के जनाजे को ले जाते लोग। संवाद