बदायूं । ककोड़ा मेला आते ही शहर के हास्य व्यंग्य के विख्यात कवि शमशेर बहादुर आँचल की पुस्तक की लोगों को याद आने लगती है। उन्होंने अपनी पुस्तक मेला ककोड़ा दर्शन में मेले का पूरा इतिहास लिखा है। ये मेला कब लगा, किसने लगवाया, कहां और क्यों लगता है। मेले का पूरा इतिहास उन्होंने काव्यात्मक तरह से लिखा है।
कवि आंचल ने लिखा है कि कैसे नवाब साहब को कुष्ठ रोग हो गया था। जिसके बाद उन्होंने मरने की ठानी। उन्होंने गंगा किनारे डेरा डाल दिया। इसके बाद वह ठीक हो गए। तब से यहां मेला लगने लगा।
पूरा प्रसंग काव्य शैली में लिखा है। उन्होंने अपनी लेखनी के जरिये इस पुस्तक को पढ़ने वाले लोगो को मेले के इतिहास और भूगोल से परिचित कराया। आंचल मेले में प्रतिवर्ष शिविर और लगभग 30 वर्षो से रैन बसेरा भी लगाते आ रहे हैं। हर वर्ष मेले में पुस्तक की दो हजार प्रतियां निशुल्क वितरित की जाती हैं।