बदायूं। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। गंभीर हालत में आने वाले मरीजों का प्रशिक्षु फार्मासिस्टों से उपचार कराया जा रहा है। बृहस्पतिवार को इसकी हकीकत भी सामने आई। इमरजेंसी में ट्रेनी फार्मासिस्ट एक बच्ची के कान में टांके लगाते हुए नजर आए। इसी तरह वार्ड बॉय की जगह मरीज के तीमारदार स्ट्रेचर को खींचते हुए नजर आए। इतनी अव्यवस्था होने के बावजूद अधिकारियों का ध्यान इस तरफ नहीं जाता है।
फार्मेसी की पढ़ाई के बाद प्रशिक्षण के लिए अस्पताल आने वाले फार्मासिस्टों को इमरजेंसी में ड्यूटी पर लगाया जाता है। इमरजेंसी में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों के हाथ की नस यह प्रशिक्षु फार्मासिस्ट कई-कई बार पंक्चर कर रहे हैं, बावजूद इसके विगो डालने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। वहीं मरीज दर्द से कराह उठता है।
बृहस्पतिवार को अनबता (6) बेड से नीचे गिर गई थी। इस वजह से उसके कान का नीचे का हिस्सा फट गया था। जब वह इमरजेंसी में पहुंची तो प्रशिक्षु फार्मासिस्ट ने कान में टांका लगाया। इसी तरह सांस लेने में तकलीफ हुई तो चंद्रशेखर उपचार के लिए इमरजेंसी में पहुंचे। ट्रेनी फार्मासिस्ट ने तीन बार हाथ की नस पंक्चर कर विगो डाला। इस दौरान वह दर्द से कराह उठे।
इसी तरह बुखार से पीड़ित निर्मला उपचार के लिए पहुंची तो ट्रेनी फार्मासिस्ट ने दो बार में उनके हाथ की नस को पंक्चर किया। वहीं, इमरजेंसी में खुद से आने वाले मरीज को तीमारदार स्ट्रेचर से खींचते हुए वार्ड तक ले जाते हुए दिखाई दिए, जबकि इसके लिए जिम्मेदार वार्ड बॉय इधर-उधर घूमते नजर आए। बता दें कि मरीज सीधे कोई मदद न मांग ले इसलिए इमरजेंसी में डॉक्टर, प्रशिक्षु फार्मासिस्ट और नियमित फार्मासिस्ट यूनिफॉर्म में नहीं आते। बृहस्पतिवार को इमरजेंसी में एक जूनियर डॉक्टर और कुछ वार्ड बॉय ही यूनिफॉर्म में दिखाई दिए।
साफ-सफाई का भी नहीं दिया जाता ध्यान
इमरजेंसी में उपचार के लिए आने वाले मरीजों के इलाज में साफ-सफाई का ध्यान नहीं दिया जा रहा। बिना गलब्स पहने ही मरीजों का खून साफ कर दिया जा रहा है। घाव को भी ठीक तरह से नहीं धोया जाता। ऐसे में संक्रमण फैलने की आशंका रहती है।
प्रशिक्षु फार्मासिस्ट टांके नहीं लगा सकते। वह सिर्फ काम सीखने के लिए आए हैं। अगर वह व्यक्ति के नस में विगो लगा भी रहे हैं तो किसी वरिष्ठ फार्मासिस्ट की निगरानी में लगाएं। ताकि अगर वह कहीं गलती करते हैं तो उसे सुधारा जा सके। इमरजेंसी का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था को ठीक किया जाएगा। - डॉ.कप्तान सिंह, सीएमएस
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बच्चे को टांका लगाते प्रशिक्षु। संवाद
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बच्चे को टांका लगाते प्रशिक्षु। संवाद