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विकास को मुंह चिढ़ाता रानेट लोहिया गांव

Tue, 13 Oct 2015 07:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
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तीन हजार की आबादी वाले इस गांव के ग्रामीण शिकायत करते हैं कि मातृ-शिशु कल्याण सेंटर खुलने के बाद से अब तक यहां कोई डॉक्टर नहीं आया है। यही कारण है कि इसके परिसर को लोग अपने कामों के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं। लोहिया गांव होने के बावजूद यहां नियुक्त सफाई कर्मी के न आने की शिकायतें ग्रामीणों की जुबान पर हैं।
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गांव को 20 सौर उर्जा स्ट्रीट लाइटों से रौशन किया जाना है, लेकिन अभी तक 12 लाइट ही लग सकी हैं। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ एक लाइट ही काम कर रही है। गांव में बीते साल लाखों रुपए खर्च करके सीसी रोड बनाया गया, जो पूरी तरह से उखड़ चुका है। ग्रामीणों को ब्लॉक की कम दूरी को पार करने के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
 पट्टेदारों को नहीं मिले पट्टों पर कब्जे
बिसौली। गांव में आधा दर्जन पट्टा धारकों को कई साल पहले पट्टा मिल गया, लेकिन आज तक उन्हें कब्जा नहीं दिया गया है। इनमें पट्टेदार नेमपाल, मुन्ने, ओमप्रकाश, सत्यपाल ओमी आदि ने गांव के प्रधान के साथ मिलकर कई बार तहसील दिवसों मे शिकायत की है। साथ ही स्थानियों का कहना है कि गांव में कई चकमार्ग दबंग कब्जाएं हुए हैं।  
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प्रधान बोले, कोई सुनवाई नहीं
बिसौली। ग्राम प्रधान हुकुम सिंह से बदतर हालत पर सवाल किए गए तो उन्होंने अफसरों द्वारा अनदेखी का रोना रोया। प्रधान का कहना है कि मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र बंद होने की शिकायत वे कई बार कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। गांव का सफाई कर्मी अपनी मर्जी से सफाई करने आता है।
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