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Budaun News: लालच-डर और अज्ञानता से साइबर ठगी के शिकार हो रहे लोग

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साइबर अपराध गोष्ठी में मौजूद डायट पिरसर में लोग। संवाद - फोटो : स्वयं
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बदायूं। लालच-डर व अज्ञानता की वजह से लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। पुलिस कभी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। पुलिस प्रशासन लगातार लोगों को इसके प्रति जागरूक कर रहा है लेकिन इसके बाद भी लोग साइबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं। इससे बचने का एक मात्र साधन जागरूकता ही है। हम सब जागरूक हों और अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करें जिससे साइबर ठगी के मामलों में कमी लाई जा सके।
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साइबर थाना प्रभारी विनोद वर्धन व साइबर सेल के प्रभारी हरेंद्र कुमार ने मंगलवार को शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि लोेग लालच-डर व अज्ञानता की वजह से साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूक होना आवश्यक है। पुलिस कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। उन्होंने छात्र-छात्राओं से अपील की, कि अपने परिवार के साथ बैठकर साइबर क्राइम पर दस मिनट तक चर्चा जरूर करें। साइबर ठगी के बारे में छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। उन्होंने अपील की कि किसी भी अनजान व्यक्ति से अपना खाता संख्या, पिन, ओटीपी, सीवीवी नंबर साझा न करें। खाते से धोखाधड़ी से पैसा निकलने की दशा में तुरंत 1930 पर कॉल अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिग पोर्टल https://cybercrime.gov.in/ पर शिकायत दर्ज करें।



जनवरी से अब तक सात मुकदमे हुए दर्ज
साइबर ठगी के मामले में जनवरी से सितंबर तक सात मुकदमे साइबर थाने पर दर्ज किए गए हैं। इनमें 10 लोगों को नामित किया गया है। 11 अन्य लोग साइबर ठगी करने के मामले में प्रकाश में आ चुके हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी में लगी है। सात लोगों से करीब 42 लाख रुपये की साइबर ठगी सामने आई है। पुलिस ने अब तक चार लाख से अधिक रुपयों को खातों में ही फ्रीज कराया गया है। 43 लाख रुपये बरामद कर पीड़ितों को लौटाने का काम भी साइबर थाना प्रभारी विनोद वर्धन ने किया है।
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साइबर एक्सपर्ट्स ने दिए बचाव के सुझाव
- सोशल मीडिया प्रोफाइल को पर्सनल (निजी) मोड पर रखें।
- सार्वजनिक स्थानों पर बैंक आईडी या पासवर्ड टाइप न करें।
- पासवर्ड में भिन्नता रखें और संभव हो तो बायोमैट्रिक का इस्तेमाल करें।
- 10 अंक के सामान्य नंबर से बैंक से कॉल नहीं आते हैं।
- जिप और क्यूआर कोड से आपका सिस्टम हैक हो सकता है।
- स्पैम मैसेज फॉरवर्ड न करें, साइबर ठगों की यहां भी सक्रियता होती है।
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बयान
- तकनीक के युग में ज्यादातर लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है। यदि कोई व्यक्ति खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) या पुलिस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी दे तो तुरंत सतर्क हो जाएं। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी कार्रवाई होती ही नहीं है। किसी भी लुभावने ऑफर में आकर निवेश करने, गूगल से हेल्पलाइन नंबर को वेरिफाई किए बगैर पैसे ट्रांसफर न करें। - हरेंद्र कुमार, साइबर सेल प्रभारी



सप्ताह में दो दिन रखें डिजिटल फास्ट
स्मार्ट फोन से जहां लोगों को सहूलियत मिली है वहीं इसका उपयोग ही साइबर ठगी का सबसे बड़ा कारण है। सप्ताह में जिस तरह से फास्ट रखकर पेट के विकारों को दूर किया जाता है वैसे ही सप्ताह में दो दिन डिजिटल फास्ट रखें, जिससे साइबर ठगी का शिकार होने से आप बच सकते हैं। - डॉ. बृजेश कुमार सिंह, एसएसपी
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