पहले शहर में बिजली
आने-जाने का समय निर्धारित था। दोपहर दो बजे से पांच बजे तक दिन में कटौती
होती थी। शाम को आठ से दस बजे तक कटौती की जाती थी, लेकिन अब तक दिन कई
बार कटौती की जाती है जिसकी वजह से लोग बिजली का शेड्यूल भी भूल गए हैं।
सुबह को अक्सर बिजली गुल रहती है। लिहाजा, इस दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत आम
लोगों को होती है। चूंकि बिजली के अभाव में नगर पालिका परिषद की जलापूर्ति
भी गुल रहती है।
बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर बोर्ड
परीक्षार्थियों पर भी देखने को मिल रहा है। कई स्टूडेंट्स ने कहा कि बिजली
के गायब रहने की वजह से उनकी परीक्षा की तैयारी भी ठीक से नहीं चल पा रही
है। बोले, यदि जल्द ही बिजली कटौती को बंद नहीं किया गया तो वह विभागीय
अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन को सड़क पर आने को मजबूर होंगे।
वीआईपी जिले में बिजली सप्लाई बदहाल
बदायूं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बदायूं के सांसद धर्मेंद्र यादव सूबे के मुखिया
के भाई हैं, ऐसे में ये जिला वीआईपी श्रेणी में शुमार होता है। जिले को
कटौती मुक्त किया जाना चाहिए, मगर यहां तो बिजली की स्थिति दिनों दिन खराब
होती जा रही है। उपभोक्ताओं ने कहा कि सांसद को चाहिए वह कम से कम 20
घंटे सप्लाई दिलाने के सार्थक प्रयास करें।
वही रटा-रटाया जवाब
बदायूं।
बिजली की अघोषित कटौती के बारे में जब विभागीय अधिकारियों से बात की गई
तो उन्होंने वहीं रटा-रटाया जबाव दिया कि कटौती ऊपर से हो रही है। साथ ही
दावा किया कि शहर में कटौती नहीं की जा रही है।