बदायूं। जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शहर और देहात की तस्वीर दो अलग-अलग दिशा में बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। वर्ष 2025-26 के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि शहर में जहां निजी अस्पतालों की ओर लगातार झुकाव बढ़ रहा है, वहीं ग्रामीण इलाकों में सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है। इसका मुख्य कारण सुविधाओं की उपलब्धता, दूरी, आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य योजनाओं तक पहुंच माना जा रहा है।
शहरी क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2025-26 में अक्तूबर तक कुल 3,015 प्रसव कराए गए। हालांकि, इसके उलट निजी अस्पतालों में यह संख्या 11,347 रही, जो सरकारी संस्थानों पर भारी पड़ती है। इसको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में प्राइवेट अस्पतालों की संख्या अधिक है। साथ ही तुरंत उपलब्धता, आधुनिक सुविधाएं, डॉक्टरों की मौजूदगी और रोगी को मिलने वालीं त्वरित सेवाएं ही शहरवासियों को निजी अस्पतालों की ओर आकर्षित करती हैं।
वहीं देहात में तस्वीर पूरी तरह उलट है। गांवों के लोग सरकारी प्रसव सेवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। वर्ष 2025-26 में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 16 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 29,961 प्रसव कराए गए, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में केवल 6,957 प्रसव ही हुए। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता, जननी सुरक्षा योजना और संस्थागत प्रसव पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि ग्रामीण परिवारों को सरकारी विकल्प चुनने के लिए प्रेरित कर रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। इसके चलते लोग बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सुरक्षित प्रसव को प्राथमिकता दे रहे हैं। दूसरी ओर शहर में विकल्पों की अधिकता और सेवा की गति निजी संस्थानों को मजबूत बना रही है।
अस्पताल सरकारी में प्रसव प्राइवेट में प्रसव
जिला महिला अस्पताल 3105 11347
-उसावां 2706 569
-सहसवान 4296 496
-बिनावर 2265 640
-उझानी 2018 1080
-दातागंज 2135 392
-कादरचौक 1760 489
-दहगवां 2464 144
-समरेर 1387 221
-बिल्सी 2176 276
-आसफपुर 1162 745
-बिसौली 1589 510
-इस्लामनगर 1583 182
-म्याऊं 2149 66
-सैदपुर 1414 268
मेडिकल कॉलेज में हुए सिर्फ 355 प्रसव
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने को लेकर काफी प्रयास किया जा रहा है, लेकिन राजकीय मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां पर वित्तीय वर्ष 2025-26 से अक्तूबर तक 355 ही प्रसव हो सके हैं। इधर, जगत के सरकारी अस्पताल की बात करें तो यहां पर 502 प्रसव कराए जा चुके हैं, लेकिन इसके विपरीत प्राइवेट अस्पतालों में 825 प्रसव हो चुके हैं।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में शहर के सरकारी अस्पतालों में 3015 तो ग्रामीण क्षेत्र के 16 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 29,961 प्रसव कराए जा चुके हैं। सभी डाॅक्टरों, एएनएम, आशाओं को निर्देशित भी किया गया है, ताकि सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या में और बढ़ोतरी हो सके। -डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ, बदायूं