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Budaun News: हर साल बढ़ रहे मरीज, 2025 तक कैसे होंगे टीबी से मुक्त

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जिला अस्पताल का क्षय रोग विभाग। संवाद
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बदायूं। एक तरफ अभियान चलाकर 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरी तरफ बदायूं जिला है जहां हर साल टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2021 में 8,447 तो 2024 में संख्या बढ़कर 12,786 पहुंच गई। साल 2025 में जनवरी से अबतक 1,236 मरीज मिल चुके हैं। वहीं मरीजों के ठीक होने का फीसद 2024 में सबसे कम और 2023 में सर्वाधिक रहा।
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वर्ष 2025 तक टीबी को खत्म करने की योजना पर काम किया जा रहा है। लेकिन पिछले चार साल में लगातार जिस तरह से टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है उससे टीबी की बीमारी के इसी साल खत्म होने की बात बेमानी है। 2021 में जिले में जहां 6,088 टीबी के मरीज थे, वहीं अब 7,268 हैं। इनमें 1236 मरीज बीते जनवरी में ही सामने आए हैं। हालांकि पूरा साल अभी बाकी है। 2021 से हर साल औसतन एक हजार मरीज बढ़ रहे हैं। 2023 में तो डेढ़ हजार से ज्यादा टीबी के मरीज बढ़े। ऐसे में सवाल यह है कि जिस तरीके से जिले में टीबी के मरीज सामने आ रहे हैं 2025 तक जिला टीबी मुक्त हो जाए, इसकी संभावना कम ही है।



बीते चार साल में सबसे कम महज 50 प्रतिशत मरीज 2024 में हुए ठीक



टीबी के मरीजों की जब संख्या की बात की जाती है तो विभाग ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा गिना देता है। 2021 से 2023 तक 90 प्रतिशत से ऊपर मरीज ठीक होना बताए गए। साल 2024 में ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा एकदम गिरकर 50 प्रतिशत पर आ गिरा। इससे स्वास्थ्य विभाग की परेशानी और बढ़ गई है। 2024 में 12,786 मरीजों में 6,170 मरीज ही ठीक हो सके, जबकि इससे पहले 2023 में 94 प्रतिशत मरीज ठीक होने का दावा किया गया था। 11,316 मरीजों में से 10,665 मरीजों के ठीक होने का दावा किया गया।
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किस वर्ष में कितने मरीज मिले

वर्ष मरीज ठीक हुए मरीज ठीक होने वाले मरीजों का प्रतिशत

2021 6088 90.25 प्रतिशत

2022 7646 90.81 प्रतिशत

2023 10665 94.24 प्रतिशत

2024 12786 6170 49.89 प्रतिशत

2025 जनवरी माह में 1236 मरीज सामने आ चुके हैं।





इस वजह से होती है टीबी

क्षय रोग अधिकारी डॉ. विनेश कुमार ने बताया कि टीबी रोग एक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। इसे फेफड़ों का रोग माना जाता है, लेकिन यह फेफड़ों से रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है। रोग सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। किसी रोगी के खांसने, बात करने, छींकने या थूकने के समय बलगम और थूक की बहुत ही छोटी-छोटी बूंदें हवा में फैल जाती हैं, जिनमें उपस्थित बैक्टीरिया कई घंटों तक हवा में रह सकता है और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सांस लेते समय प्रवेश करके रोग पैदा कर सकता है।



अधिकारियों समेत जनप्रतिनिधियों ने गोद लिए 2,085 मरीज

जिले में टीबी के मरीजों की संख्या 7,268 है। इनकी निगरानी में 862 कर्मचारी लगाए गए हैं। लगातार मरीजों का फॉलोअप किया जा रहा है। डीएम समेत प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने इन मरीजों में से 2085 को गोद लिया है। सभी मरीजों को लगातार पोषण पोटली प्रदान की गई है। ताकि मरीजों को समय से पोषण मिल सके और वह जल्द ही स्वास्थ्य होकर रोग से छुटकारा पा सकें।





132 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त कराने का दावा

जिले में 1037 ग्राम पंचायतें हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2025 में 132 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त कराने का दावा किया गया है। देखना यह होगा कि विभाग बाकी बची ग्राम पंचायतों को इस साल टीबी मुक्त कर पाता है या नहीं।





जनपद में टीबी के रोगियों की खोज के लिए सभी ब्लॉकों में अभियान चलाया जा रहा है। टीमों द्वारा घर-घर जाकर संदिग्ध लोगों की खोज कराई जा रही है। टीबी संक्रमित मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। उम्मीद है कि 90 प्रतिशत मरीज साल के अंत तक ठीक हो जाएंगे।- रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ
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