प्रभारी सीएमएस ने दी यह दलील
प्रभारी सीएमएस डॉक्टर ज्ञानेंद्र यादव ने बताया कि रात में टीबी वार्ड में एक मरीज की मौत हो गई थी। उसे देखकर वह घबरा गया, जिससे उसकी सांस फूलने लगी। स्टाफ ने उसे इंजेक्शन लगाए थे। दवाई भी दी। सुबह जब मरीज के पिता काउंटर पर दवाई लेने गए, तभी मरीज ने खिड़की धक्का देकर खोला और नीचे कूद गया।
पहले भी खिड़की से कूदकर मरीज कर चुका है आत्महत्या
कोरोना काल में भी एक मरीज ने खिड़की से कूदकर आत्महत्या की थी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने खिड़कियों को ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। इसी वजह से एक बार फिर घटना सामने आई है। मेडिकल कॉलेज लगातार विवादों के घेरे में है। बच्ची की मौत के मामले में कार्रवाई न होना लापरवाही को उजागर कर रहा है। बच्ची की मौत के मामले में तीसरी जांच चल रही है।