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पार्किंग स्टैंड वाले पालिका को लगा रहे चूना, कुछ ने जमा की थोड़ी राशि तो एक का चेक बाउंस

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बदायूं। शहर में तमाम जगह ऐसी हैं जहां पर बिना पालिका को जानकारी में दिए पार्किंग स्टैंड लोगों ने खोल रखे हैं। जब पालिका द्वारा शहर में सर्वे कराया गया, तो इन पार्किंग स्टैंड के बारे में पता चला। इसके बाद पालिका ने इन लोगों को नोटिस जारी कर जलकर के रूप में धनराशि जमा करने के निर्देश दिए लेकिन तमाम संचालकों ने यह धनराशि जमा नहीं की। पालिका ने जब कार्रवाई की बात की तो कुछ लोगों ने पैसा तो जमा कर दिया लेकिन यह कुल राशि का 10 प्रतिशत भी नहीं रहा। एक संचालक का तो चेक ही बाउंस हो गया।
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शहर के हर घर में दोपहिया से लेकर चार पहिया वाहन हैं। दोपहिया वाहनों को तो लोग घरों में खड़ा कर लेते हैं लेकिन काफी परिवार ऐसे हैं, जिनके यहां पर चौपहिया वाहनों को खड़ा करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। लोगों की इसी समस्या को कुछ लोगों ने अपने व्यवसाय का साधन बनाते हुए अपनी खाली पड़ी जगह या प्लॉट को पार्किंग का रूप दे दिया है। ये लोग वाहन मालिकों से इसके एवज में प्रतिमाह किराया वसूलते हैं। पार्किंग स्थलों का फायदा लोगों को काफी मिल रहा है, लेकिन पार्किंग स्थल वालों ने इसकी जानकारी पालिका को नहीं दी और जमीन का व्यवसायिक उपयोग शुरू कर दिया। ऐसे में पालिका की नजर में यह अवैध माना गया है।
जब पालिका की ओर से शहर में घरों का सर्वे कराया गया, तो पता चला कि शहर में तमाम जगह पार्किंग स्थल संचालित हैं। इसको लेकर नगर पालिका की ओर से इन लोगों को नोटिस जारी कर जलकर के रूप में किराया जमा करने के निर्देश दिए, लेकिन किसी भी व्यापारी ने इस ओर से ध्यान नहीं दिया। पालिका ईओ/ सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से इन अवैध पार्किंग संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए, तब संचालकों ने अधिकारियों के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। जिसके बाद में ईओ ने इनको कुछ समय धनराशि जमा करने के लिए दिया। लेकिन फिर भी संचालकों ने पूरी धनराशि जमा नहीं की। कुछ ने पैसा जमा भी किया तो वह कुल राशि का दस प्रतिशत भी नहीं रहा।
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पार्किंग के नाम पर पालिका नहीं ले सकती टैक्स
- नगर पालिका के पास अभी ऐसा कोई शासनादेश नहीं है, जिसके तहत वह पार्किंग संचालकों से सीधे तौर पर टैक्स जमा कर सके। इसकी वजह से पालिका प्रशासन उनसे जलकर के नाम पर धनराशि जमा कर रही है, क्योंकि आदेश के मुताबिक जो भी व्यक्ति अपने प्राइवेट जमीन को व्यवसायिक उपयोग करेगा, तो उसे जलकर अवश्य देना होगा। साथ ही इसकी जानकारी भी पालिका में देनी होगी। ऐसा न करने पर उस पर जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है।
पालिका के मुताबिक ये हैं बड़े बकायेदार-
नाम- बकाया- जमा किया
- सुषमा बत्रा- पांच लाख 36 हजार रुपये- 71 हजार रुपये
- क्षितिज कुमार- चार लाख 84 हजार रुपये- 54 हजार रुपये
- मनोज गुप्ता- पांच लाख 49 हजार रुपये- 35 हजार रुपये
- जितेंद्र महाजन- चार लाख आठ हजार रुपये- 30 हजार रुपये
- अर्चित वैश्य- छह लाख 50 हजार 766 रुपये- दो लाख 63 हजार 79 रुपये का चेक (बाउंस)-
पालिका के कर्मचारियों द्वारा पार्किंग संचालकों से लगातार जलकर वसूली की कार्रवाई की जा रही है, ताकि पालिका की आय में बढ़ोतरी की जा सके। जो पार्किंग संचालक जलकर की धनराशि जमा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी। एक संचालक ने धनराशि का चेक दिया था जो बाउंस हो गया, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट/ ईओ
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