प्रदेश सरकार पहली बार परिषदीय स्कूलों के बच्चों को जूते-मौजे देगी। इसके लिए शासन स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूर्ण भी हो चुकी हैं। हर जिले के बीएसए से बच्चों के जूते-मौजे का साइज मांगा गया है। सो बीएसए ने यहां से भी जूते-मौजे का साइज भेज दिए हैं। यदि योजना पर अमल हुआ तो जिले के तीन लाख से ज्यादा बच्चों को जूते-मौजे मिलेंगे।
कांवेंट स्कूलों से मुकाबले को सरकार परिषदीय स्कूलों की स्थिति में सुधार को तरह-तरह की योजनाएं ला रही है। चालू सत्र से पहले तक बच्चों को एमडीएम के साथ ही निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, यूनिफार्म मिलती थी। सपा सरकार ने बच्चों को बैग भी दिए। मौजूदा प्रदेश सरकार ने बच्चों को जूते-मौजे देने का भी फरमान जारी कर दिया। योजना को लागू भी कर दिया गया है। जूते-मौजे की खरीद को राज्य स्तर पर टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। फिर विभाग के सामने आई बच्चों के दिए जाने वाले जूते-मौजे के साइज की। विभागीय आला अफसरों ने सभी बीएसए से जूते-मौजे का साइज देने के निर्देश दिए। बीएसए पीसी यादव ने बताया कि उन्होंने परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के कद को देखते हुए साइज भेज दिया है। बोले-उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही जूते-मौजे आ जाएंगे। बीएसए ने बताया कि इस योजना के तहत जिले के तीन लाख से ज्यादा बच्चे लाभांवित होंगे। यादव ने यह भी दावा किया कि जिले के सभी स्कूलों के बच्चों को यूनिफार्म वितरित की जा चुकी है। बैग भी दिए जा रहे हैं।