नियमानुकूल 1038 मेें से 817 ग्राम पंचायतों में हो सकी पहली बैठक
221 प्रधान चुने जाने के बाद भी नहीं आए अस्तित्व में, बैठक नहीं कर सके
पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार जिले के बीडीओ ने अपने-अपने ब्लाक क्षेत्र में इन बैठकों के लिए सभी एडीओ को पर्यवेक्षण में लगाया। सचिवों ने बैठकें आयोजित कीं। नवगठित ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने इन बैठकों की अध्यक्षता की। ज्ञात रहे, जिले में नए परिसीमन के आधार पर कराए गए चुनाव में 1038 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 220 ग्राम पंचायतों में सदस्यों का कोरम पूरा नहीं हो सका। इसके अलावा इस्लामनगर की एक ग्राम पंचायत में प्रधान के जेल में बंद होने के कारण यहां पहली बैठक नहीं हो सकी।
बैठक के दौरान जहां छह-छह ग्राम समितियों का गठन हुआ। साथ ही शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में सदस्य और प्रधानों को प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने जानकारी दी। कई बैठकों में ग्राम विकास की योजनाएं भी बनाई गईं।
दबतोरी प्रतिनिधि द्वारा आदपुर में मुकेश चंद्र माहेश्वरी, लक्ष्मीपुर में इशरत, संग्रामपुर में सादिका बेगम, दबतोरा में मुरादन और ललुआ नगला में कुसुम प्रधान की अध्यक्षता में बैठक हुई। दातागंज ब्लाक के गांव बिहारीपुर में तहसीन की अध्यक्षता में बैठक हुई। नूरपुर पिनौनी प्रतिनिधि के अनुसार यहां मीरा देवी की अध्यक्षता में बैठक हुई। रिसौली प्रतिनिधि के अनुसार सचिव अशोक गोस्वामी की मौजूदगी में प्रधान विमला देवी की अध्यक्षता में बैठक हुई।
सामने आई पंचायत भवन की दुर्दशा
बदायूं। नवगठित ग्राम पंचायतों की पहली बैठक यूं तो पंचायत भवन में होनी चाहिए थी। लेकिन कई पंचायत भवन खराब हालत में हैं, या कई गांव में उनका निर्माण ही नहीं हुआ है। ऐसी जगह स्कूलों में यह बैठक आयोजित की गई। वहीं जिन गांवों के प्रधान हैं, उनके किसी मजरे में पंचायत भवन नहीं है तो प्रधानों ने वहां न जाकर अपने गांव में ही बैठक की।
सतर्क रहा पुलिस, प्रशासन
बदायूं। पंचायतों की पहली बैठक को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पुलिस अधिकारियों को निर्देश थे कि पहली बैठक के दौरान ग्राम पंचायतों पर नजर रखी जाए और खराब हालातों पर तत्काल कार्रवाई की योजना बनाकर रखी जाए।