फसलों पर पड़ा ‘पाला’, बिछी बर्फ जैसी चादर
करीब डेढ़ दशक बाद इलाके में मंगलवार इस कदर तुसार (पाला) पड़ा कि पौधे कुमलाए नजर आए। सब्जी फसलों को तो तुसार ने बर्फ जैसी चादर ने अपने आगोश में समेट लिया। आलू क्या गोभी, सरसों और शिमला मिर्च के पत्ते भी पहले दिन ही झुलसने के कगार पहुंच गए हैं।
मंगलवार शाम से ही तापमान में तेजी के साथ गिरावट के बीच सुबह में काश्तकार खेतों पर पहुंचे तो फसलों पर तुसार का प्रकोप देख कड़ाके की ठंड में भी पसीना छूट गया। किसानों में भागमल चौधरी ने डेढ़ दशक के बाद उन्हें पहली बार इस सीजन में जबर्दस्त तुसार का अहसास हुआ है। आलू और पत्तेदार सब्जियों को तो तुसार ने बर्फ जैसी चादर ने लपेट रखा था। गेहूं को तुसार से अभी किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं है लेकिन पत्तेदार सब्जियों में गोभी, शिमला मिर्च, टमाटर और आलू की फसल ऐसे ही दो-तीन दिन तक तुसार पड़ने की स्थिति में झुलसने लगेगी। पालक, मैथी और टमाटर को ज्यादा नुकसान की आशंका बनी हुई है। वैज्ञानि क भी कहते हैं कि ज्यादा तुसार पड़ने से सब्जी फसलों की बढ़वार प्रभावित होती है।
बचाव को फसलों में करें हल्की सिचाई
उझानी। तुसार से फसलों को लिए देसी नुस्खों पर गौर करें तो इसका सबसे अच्छा तरीका हल्का सिचाई का है। हल्की सिचाई करने से पौधे झुलसने से बच जाते हैं। इससे वैज्ञानिक भी इंकार नहीं करते। वैसे, खासकर आलू की फसल को तुसार के प्रकोप से बचाने के लिए प्रति एकड़ फसल में एक निश्चित दू पर पांच-छह जगह धुआं करके वायुमंडल को फसल के अनुरूप किया जा सकता है। यह नुस्खा किसान पहले भी अपनाते रहे हैं।
इलाके के किसानों ने मंगलवार रात पड़े तुसार (पाला) के प्रकोप से कृषि विज्ञान केंद्र पर आकर अवगत कराया है। उन्हें सलाह दी गई है कि वह देसी नुस्खों पर गौर करते हुए पौधों को झुलसने से बचाएं। तुसार का प्रकोप इसलिए भी बढ़ा है कि पहाड़ी इलाकों में वर्फबारी हो रही है।- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक, पादक सुरक्षा।