यहां स्थित स्पोर्टस स्टेडियम में न तो संसाधन हैं और न ही कोच। जिले में
खुद की मेहनत पर खेल प्रतिभाएं उभर रही हैं। यहां के कई खिलाड़ी राज्य और
राष्ट्रीय स्तर के खेलों में हिस्सा ले चुके हैं। स्टेडियम के रख-रखाव के
नाम पर हर साल मोटा बजट खर्च किया जाता है।
शहर से करीब पांच किलोमीटर
दूर बिल्सी रोड पर जब स्पोर्टस स्टेडियम बना तब लोगों को उम्मीद जगी थी कि
उनके होनहार लाडलों खेल में निखार आएगा, जिससे बदायूं का नाम रोशन होगा।
मगर दिन गुजरने के साथ धीरे-धीरे लोगों की उम्मीदें धूमिल होती गईं।
अधिकांश खेलों के पूर्णकालिक कोच न होने से खिलाड़ियों का स्टेडियम से
मोहभंग हो गया। स्थिति यह है कि 29 अगस्त को महान हॉकी खिलाड़ी मेजर
ध्यानचंद के जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाकर औपचारिकताएं
पूरी कर ली जाती हैं। कोच के बिना स्टेडियम का खिलाड़ियों को कोई लाभ नहीं
मिल रहा। कई खिलाड़ी अपनी मेहनत के बल पर खुद और जिले का नाम रोशन कर रहे
हैं।
सीमित संसाधनों में पाई सफलता
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राजेश के पास सीमित
संसाधन थे। स्पोर्ट स्टेडियम में भी बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिला। इसके
बावजूद राजेश ने अपना जज्बा कम नहीं होने दिया। उसने पॉवर लिफ्टिंग में
पहली बार 2012 में गोल्ड मेडल जीता था। जनवरी 2015 में राजेश को पॉवर
लिफ्टिंग में स्ट्रांग मैन चुना गया।
राष्ट्र स्तर पर नाम कमाने की तमन्ना
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स्वाती ने राज्य स्तर पर कमाया नाम
जिले
का नाम रोशन करने में लड़कियां भी पीछे नहीं हैं। ब्राह्मपुर की स्वाती ने
राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल करके यह साबित कर दिया। एक साल पहले पॉवर
लिफ्टिंग में कैरियर शुरू करने के बाद स्वाती सीमित संसाधनों के बीच आगे
बढ़ रही है।
स्टेडियम की स्थिति
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कोच खिलाड़ी
टेनिस 1 15
पॉवरलिफ्टिंग 1 25
वॉलीबाल 1 10
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वर्जन-
मैंने
दो महीने पहले ही चार्ज लिया है। यह सही है कि यहां स्थिति संतोषजनक नहीं
है। व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए तेजी से काम हो रहे हैं। विद्यालयों से
भी संपर्क किया जा रहा है। उम्मीद है कि बदायूं स्टेडियम की स्थिति भी जल्द
बेहतर होगी।
-देशकांत त्यागी, क्रीड़ा अधिकारी