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ओवररेट की मार : बाजार में डीएपी का कट्टा 1700 रुपये के पार

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खाद के लिए अलीगंज सहकारी समिति के बाहर रात में लगी किसानों की भीड़। जागरूक पाठक
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बदायूं/ उझानी। आलू की बोवाई के दिनों में डीएपी की किल्लत से जिले के किसान परेशान हैं। समितियों पर डीएपी का अभाव होने से किसानों को मार्केट की ओर रुख करना पड़ रहा है। करीब 350 रुपये के ओवररेट के साथ कट्टा उन्हें 1700 रुपये से कम में नहीं मिल रहा है। इसी के चलते किसान आलू की फसल की बोवाई नहीं कर पा रहे।
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डीएपी पर कालाबाजारी शहर के अलावा किसी एक कस्बे में नहीं, बल्कि देहात क्षेत्र में हो रही है। उझानी में तो तीन दिन पहले प्रति कट्टे पर 350 रुपये वसूले जाने का वीडियो भी वायरल हुआ था। कालाबाजारी करने वाले दुकानदार 1700 रुपये से कम पर डीएपी का कट्टा नहीं बेचना चाहते।दरअसल, डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके को भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एनपीके में तत्वों की संख्या भी अधिक होती है, लेकिन किसान डीएपी के इस्तेमाल को वरीयता देते हैं। किसानों की मानें तो आलू की बोवाई के दौरान प्रति बीघा खेत में करीब 60 किलोग्राम डीएपी डालते हैं। ऐसे भी किसान कम नहीं हैं, जो 20 बीघा से अधिक रकबा में आलू पैदा करते हैं।
खुले बाजार के मुकाबले साधन सहकारी समितियों और बहुउद्देश्यीय क्षेत्रीय समितियों पर इन दिनों डीएपी की किल्लत है। बताते हैं कि जिन समितियों पर डीएपी पहुंचने की भनक किसानों को लगती है, वहां सैकड़ों की संख्या में किसान समिति के खुलने से पहले ही इकट्ठे हो जाते हैं। मुजरिया क्षेत्र की समिति पर ऐसा ही देखने को मिला।
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यहां बता दें कि आलू की बोवाई 15 नवंबर तक की जा सकती है, लेकिन समितियों पर समय रहते पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिलने से आलू की बोवाई पिछड़ती जा रही है। पछेती बोवाई से आलू की पैदावार प्रभावित होती है।

कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता करते हैं अफसर, नहीं दर्ज की जाती रिपोर्ट
डीएपी की किल्लत यूं ही नहीं पैदा होती। कालाबाजारी करने वाले दुकानदार आर्थिक फायदे के लिए पहले स्टॉक शून्य बताकर किसानों को गुमराह कर देते हैं, फिर अगर उन्हें कट्टे देने हों तो मनमाने दाम वसूलते हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता गंगा सिंह शाक्य कहते हैं कि ऐसा कृषि विभाग के अफसरों से बिना साठगांठ के नहीं हो सकता। वह किसी दुकान पर ओवररेट का मामला उजागर हो जाए तो नोटिस या फिर लाइसेंस सस्पेंड कर देने की कार्रवाई कर देते हैं। शाक्य का कहना है कि कालाबाजारी करने वालों पर रिपोर्ट दर्ज कराई जानी चाहिए।

तीन हजार एमटी का हो चुका है वितरण
कृषि विभाग के अनुसार, पिछली बार जिले में साढ़े 22 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल हुई थी। इस बार 24 हजार हेक्टेयर में आलू की बोवाई किए जाने की उम्मीद है। अब तक जिले में तीन हजार एमटी डीएपी का वितरण हो चुका है। समितियों और प्राइवेट दुकानों पर 4300 एमटी डीएपी मौजूद है।
जिला कृषि अधिकारी डीके सिंह के अनुसार, आलू की बोवाई जनपद में 80 से 90 फीसदी हो चुकी है, जो लोग बोवाई करने के बचे हुए हैं। उनमें से अधिकांश के पास डीएपी मौजूद है। अब लोगों की ओर से गेहूं की बोवाई को लेकर स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इसकी वजह से यह चीजें सामने आ रही है, जबकि जिले में पर्याप्त मात्रा में डीएपी मौजूद है। किसानाें को परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगले माह 1200 एमटी और डीएपी की रैक आने की संभावना है।



किसान बोले, ओवररेट से जेब पर डाका

डीएपी की वजह से आलू की फसल लेट हो रही है। समितियों पर जाओ तो नैनो डीएपी खरीदने पर जोर दिया जाता है। बाजार में ओवररेट से जेब पर डाका डाला जा रहा है। एक सप्ताह से परेशान हूं।- वीरपाल यादव, किसान


मंडी परिसर में भी डीएपी वितरण केंद्र है। यहां जब भी डीएपी बांटी जाती है, हर बार ही किसानों की लाइन नजर आती है। किसानों की परेशानी पर कोई गौर नहीं करता। डीएपी बाजार में भी सरकारी रेट पर मिलनी चाहिए।- उपेंद्र शर्मा, किसान


पिछले दिनों सरसों की बोवाई की तो डीएपी आसानी से मिल गई थी, लेकिन आलू की बोवाई के दिन आने पर किल्लत शुरू हो गई। बाजार में किसानों से अधिक रुपये वसूले जा रहे हैं। ओवररेट पर रोकथाम होनी चाहिए।- पप्पू सिंह, किसान


आलू की बोवाई के दिनों में ही डीएपी की किल्लत क्यों होती है। सिर्फ किसानों को नुकसान पहुंचाने के लिए ऐसा किया जाता है। डीएपी ओवररेट खरीदने से फसल पर लागत बढ़ जाती है। - सलमान खान, किसान

खाद के लिए अलीगंज सहकारी समिति के बाहर रात में लगी किसानों की भीड़। जागरूक पाठक

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