बदायूं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों में स्वच्छता और रंगाई-पुताई सहित अन्य आवश्यक कार्योँ केे लिए कंपोजिट ग्रांट शासन की तरफ से दी जाती है। इस बार भी शासन ने सभी जिलों के विद्यालयों के लिए ग्रांट जारी कर दी है, जबकि जिले के कई विद्यालयों में अभी तक पिछले साल की कंपोजिट ग्रांट का उचित तरीके से उपयोग नहीं किया गया है, साथ ही इसमें हेरफेर भी किया गया है। ये बात बीएसए के निरीक्षण के दौरान भी कई बार सामने आई है, जिस पर उन्होंने कई विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट का उचित उपयोग नहीं होने पर शिक्षकों को तलब भी किया और उन्हें सही तरीके से काम कराने की चेतावनी दी।
सरकार द्वारा परिषदीय स्कूलों में व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से कंपोजिट ग्रांट विद्यालय में पंजीकृत छात्र संख्या के आधार पर आवंटित की जाती है। इसकी 10 फीसदी धनराशि स्वच्छता पर व्यय की जाती है। बाकी धनराशि को विद्यालय की अन्य कमियों को दूर करने के लिए दिया जाता है। हालांकि विभाग के द्वारा कंपोजिट ग्रांट से स्कूलों में क्या-क्या सामान खरीदा जाना है, उसकी सूची विभाग द्वारा जारी की जाती है। उसी सूची के अनुसार सामान की खरीदारी की जाती है। पिछली बार जब ये धनराशि प्रधानाध्यापकों के खातों में पहुंची, तो अधिकांश विद्यालयों में इस धनराशि का दुरुपयोग किया गया। इस बात का खुलासा बीएसए के निरीक्षण के दौरान भी हुआ। अब इस साल के लिए शासन ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों के लिए फिर कंपोजिट ग्रांट जारी कर दी है। ऐसे में ग्रांट जारी होने से गोलमाल करने वाले प्रधानाचार्यो/ सहायक अध्यापकों के चेहरे खिल गए हैं।
बीएसए को मिली थीं हेरफेर
- बीएसए रामपाल सिंह राजपूत ने 16 नवंबर को उच्च प्राथमिक विद्यालय दौरी का निरीक्षण किया। वहां पर मानक के अनुरूप कंपोजिट ग्रांट से काम होता नहीं मिला। इस पर उन्होंने इंचार्ज प्रधानाध्यापिका प्रतिभा रानी को अभिलेखों के साथ में तलब किया, वहीं नौ दिसंबर को बीएसए ने प्राथमिक विद्यालय चंदनपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें कंपोजिट ग्रांट से एक प्रतिशत भी काम होता नहीं मिला। इस पर नाराजगी जाते हुए उन्होंने एनपीआरसी/सहायक अध्यापक संजीव कुमार सक्सेना को अभिलेखों के साथ तलब किया, साथ ही इन विद्यालयों समेत कुछ अन्य विद्यालयों में सुधार करने की चेतावनी दी।
ऑडिट करने वाली टीम की भूमिका भी संदिग्ध
-जिलेभर के विद्यालयों का टीम द्वारा ऑडिट किया गया था। उस वक्त उन्होंने विद्यालयों की स्थिति और अभिलेखों की गहनता से जांच करने के उपरांत ही विद्यालयों को क्लीन चिट दी थी, जबकि बीएसए द्वारा विद्यालयों के निरीक्षण में कंपोजिट ग्रांट द्वारा काम नहीं कराए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में ऑडिट करने वाली टीम की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
इस छात्र संख्या के आधार पर मिलती है धनराशि
-1 से 15 तक-12 हजार 500
-16 से 100 तक-25 हजार रुपये
-101 से 250 तक-50 हजार रुपये
251 से 1000 तक-75 हजार रुपये
निरीक्षण के दौरान कुछ विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट का उपयोग ठीक प्रकार से नहीं किया हुआ पाया गया। उन स्कूलों के शिक्षकों को अभिलेखों के साथ तलब किया है, साथ ही जहां पर छोटी-छोटी कमी थी, उनको सुधार के निर्देश दिए गए हैं। शासन द्वारा इस वर्ष के लिए भी कंपोजिट ग्रांट जारी कर दी गई है।
-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए