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%आदेश मिला तो पट्टे की जमीन दे दी...पर पैसा क्यों दें वापस%

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बदायूं। जिले भर में फैली बेसिक शिक्षा विभाग की जमीनों से जिला पंचायत ने शासन के निर्देश पर कब्जे तो छोड़ना शुरू कर दिए हैं, मगर 48 सालों तक पट्टे के नाम पर मिली मोटी रकम देने को तैयार नहीं है। बीएसए ने इस रकम को पाने के लिए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) को पत्र भी भेजा, मगर उधर से चुप्पी ही साध ली गई। जिला पंचायत की मंशा साफ है कि वह रकम नहीं लौटाएगी।
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देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गांव और शहरों में सरकारी स्कूल खोले गए। तब इसकी जमीन, बिल्डिंग की देख रेख जिला पंचायत के अधीन थी, साथ ही शिक्षा की देखरेख जिला परिषद (अब जिला पंचायत) के पास में थी। शासन की ओर से वर्ष 1971 में बेसिक शिक्षा विभाग का गठन किया गया। ऐसे में शिक्षा से संबंधित बिल्डिंग, जमीन के सभी अधिकारी भी बेसिक शिक्षा विभाग को दे दिए गए। इसके बाद में बेसिक विभाग ने शिक्षा से लेकर बिल्डिंग तो तुरंत ले लीं, लेकिन जमीन पाने के लिए उन्हें काफी पत्राचार करना पड़ा। इसके बाद में जिला पंचायत की तरफ से कुछ जमीन बेसिक शिक्षा विभाग को मुहैया कराई गई, साथ ही बाकी जमीन बाद में देने की बात कही गई। पूरी जमीन नहीं मिलने की शिकायत बेसिक विभाग ने फिर शासन से की, जिसके बाद शासन ने जिला पंचायत को निर्देश दिए कि बेसिक शिक्षा विभाग को उसकी पूरी जमीन दी जाए, साथ ही पिछले सालों में जो जमीन पट्टे पर उठाई गई थी, उस दौरान जो भी धनराशि मिली, उसे विभाग के खाते में जमा किया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसको लेकर विभाग ने जिला पंचायत के एएमए को पत्र भेजा है।
मामला यह फंसा है कि बेसिक शिक्षा विभाग की जमीनों को पट्टे पर उठाकर जिला पंचायत पैसा वसूलती रही। पिछले दिनों शासन की सख्ती के चलते जिला पंचायत ने सभी जमीन विभाग को वापस कर दीं। मगर पट्टे की वसूली की रकम जमा नहीं की गई। इसको लेकर जब बीएसए ने जिला पंचायत के एएमए को पत्र भेजा तो जिला पंचायत ने साफ कह दिया कि शासन के आदेश पर जमीन वापस दे दी है, पर पट्टे उठाने में मिली धनराशि जिला पंचायत की है, इसलिए इसे वापस करने का सवाल ही नहीं उठता। अब ऐसे मेें दोनों विभागों के बीच उठापठक होना तय माना जा रहा है।
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इसलिए नहीं हट रहा था जिला पंचायत का मोह
बेसिक विभाग की जमीन से जिला पंचायत का मोह इसलिए नहीं हट रहा था, क्योंकि पंचायत की ओर से हर साल बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की जमीन को पट्टे पर उठाया जाता है। दबंग लोग यहां खेती भी करते हैं। इसके एवज में करोड़ों रुपये का पंचायत को मुनाफा होता है। हालांकि शासन की संख्ती की वजह से अब ये जमीन वापस देने पड़ी है।
जिला पंचायत में सिर्फ कागजों में जमीन की वापस
जिला पंचायत की ओर से जिन लोगों को पट्टे दिए गए थे, उनके सभी कागज बेसिक शिक्षा विभाग को दे दिए गए, लेकिन जिला पंचायत की ओर से भूमि से कब्जा नहीं हटवाया गया। ऐसे में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी बीईओ को पत्र जारी कर इन जमीनों से कब्जा हटवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर जरूरत पड़े, तो इसमें एसडीएम से भी सहयोग लें।
मंडलायुक्त ने भी दिए बीएसए को निर्देश
पिछले दिनों बरेली में हुई बैठक में मंडलायुक्त रणवीर प्रसाद ने बेसिक शिक्षा विभाग की बैठक ली थी, इसमें सभी जिलों से कार्य की प्रगति रिपोर्ट देखी। उन्होंने बदायूं बीएसए रामपाल सिंह राजपूत से जमीन के संबंध में प्रगति रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट देखने के बाद बीएसए को जमीन खाली कराने के निर्देश दिए गए।
दबंगों का कब्जा बरकरार है जमीनों पर
दबतोरी। भले ही दबंगों से विभाग की भूमि से कब्जा हटवाए जाने को निर्देश मिल चुके हों लेकिन अभी तक किसी जमीन से अबैध कब्जा नहीं हटवाया है और दबंग पहले की तरह उस जमीन पर फसलों को उगा रहे हैं। क्षेत्र के परसिया, लक्ष्मीपुर, मुसियानगला आदि गांव के सरकारी प्राइमरी और उच्च प्राइमरी स्कूलों में सैकड़ों बीघा जमीन है जिस पर अभी भी दबंग लोगों का कब्जा बरकरार है ।
बरेली में विभागीय बैठक थी। इसमें मंडलायुक्त ने जमीन संबंधी जानकारी पूछी थी, वह दे दी है, साथ ही बीईओ को जमीन से कब्जा हटवाने के निर्देेश दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि अगर जरूरत हो, तो एसडीएम से भी इसमें सहयोग लें ले। -रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
हां, बेसिक विभाग की कुछ जगह थी, शासन से निर्देश मिलने के बाद में उसको वापस कर दिया गया है। कुछ जगह पट्टे पर उठी है, पट्टा खत्म होते ही वापस कर दी जाएगी। चूंकि पट्टे पर जमीन जिला पंचायत ने उठाई है, ऐसे में प्राप्त धनराशि जिला पंचायत की है, जो किसी को नहीं दी जाएगी। -सीपी राघव, एएमए जिला पंचायत
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