बदायूं/उघैती। उघैती के गांव करनपुर में स्थाई या अस्थाई गोशाला आज तक नहीं खोली गई, जबकि ग्रामीण कई बार जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारियों तक इसकी गुहार लगा चुके हैं। छुट्टा गोवंश किसानों की फसलों को तबाह कर रहे हैं। मगर कोई सुनने वाला नहीं है। इससे परेशान होकर ग्रामीणों ने गुरुवार को गांव के सभी छुट्टा गोवंश को पकड़कर उच्च प्राथमिक विद्यालय में बंद कर दिया, साथ ही गांव में गोशाला खोले जाने की मांग करने लगे। सूचना पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से बात की। बमुश्किल ग्रामीणों ने एसडीएम के आश्वासन पर गोवंश को विद्यालय से बाहर निकाला, तब कहीं जाकर पढ़ाई सुचारु हो सकी।
प्रदेश सरकार के आदेश थे कि हर ग्राम पंचायत में जरूरत के हिसाब से स्थाई या अस्थाई गोशालाएं खोली जाएं, लेकिन जिले में जहां पर गोशाला बनाए जाने की जरूरत थी, वहां पर आज तक गोशाला को बनाया ही नहीं गया। बल्कि जो अस्थाई गोशालाएं खोली गईं, वह भी धीरे-धीरे बंद होनी लगी हैं। इसकी वजह वहां के प्रधान, सचिव समेत अन्य स्थानीय अधिकारियों द्वारा इस ओर रुचि नहीं लेना है। ऐसे में गोशालाओं में छुट्टा पशुओं की संख्या कम और खेतों और सड़कों पर घूमने वाले पशुओं की संख्या बढ़ने लगी। जिले के कई गांव बिना गोशालाओं के चले रहे हैं, जबकि यहां पर गोशाला की बेहद ही जरूरत है। गुरुवार को उघैती के गांव करनपुर के ग्रामीणों ने छुट्टा गोवंश से परेशान होकर उन्हें पकड़ कर उच्च प्राथमिक स्कूल में बंद कर दिया और गांव में गोशाला बनवाए जाने की मांग करने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि छुट्टा गोवंश खेतों में उनकी फसलों को खराब कर रहे हैं, इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। छुट्टा पशुओं ने कई बार लोगों पर हमला भी कर दिया है। इस वजह से वह चोटिल भी हो चुके हैं। स्कूल में पशु होने के कारण ग्रामीणों ने स्कूल आने वाले बच्चों को भी बाहर रोक लिया। कुछ वापस चले गए तो कुछ वहीं रहे। सूचना पर एसडीएम बिसौली किशोर गुप्त समेत पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ स्कूल के एक कक्ष में बैठकर बात की, साथ ही उनकी समस्याओं को सुना। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही गांव में गोशाला खोली जाएगी। जिसमें सभी छुट्टा पशुओं को रखा जाएगा।
दोपहर में शुरू हुई पढ़ाई
-सुबह से लेकर दोपहर तक विद्यालय में ड्रामा चलता रहा, क्योंकि विद्यालय मेें ग्रामीणों द्वारा गोवंश बंद करके रखे गए थे। एसडीएम के आश्वासन पर ग्रामीण दोपहर में मानें, तब उन्होंने विद्यालय से पशुओं को बाहर निकाला। उसके बाद में छात्र-छात्राएं विद्यालय में पढ़ाई करने के लिए पहुंचे। हालांकि विद्यालय मेें ज्यादा देर पढ़ाई नहीं हो सकी। क्योंकि कुछ समय बाद में विद्यालय बंद होने का समय हो गया था।
सेटाखेड़ा गांव में ग्रामीणों ने बंद किया थे गोवंश
-ब्लॉक आसफपुर के गांव सेटाखेड़ा के प्राथमिक विद्यालय में ग्रामीणों ने 28 जुलाई को छुट्टा गोवंश को बंद कर दिया था। ग्रामीणों का कहना था उनकी वजह से फसलों को नुकसान हो रहा है। कोई भी अधिकारी उनकी समस्याओं को सुनने के लिए तैयार नहीं है। इससे परेशान होकर वहां पर भी ग्रामीणों ने ये कदम उठाया था। ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया था और अधिकारियों द्वारा काफी समझाने के बाद ही माने थे।
ये हैं आकड़े--
पहले अस्थाई गोशाला-699
अब अस्थाई गोशाला-350
गोशालाओं में पशु-6430
गांव में छोटी गोशाला बनाने के लिए मंजूरी मिली थी, लेकिन छुट्टा पशुओं की संख्या अधिक होने की वजह से उसके लिए मना करते हुए बड़ी गोशाला की मांग की गई, जिसके लिए अभी तक विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। -नीलम, प्रधान
ग्रामीणों द्वारा विद्यालय में गोवंश को बंद कर दिया गया था। मौके पर पहुंचकर गांव वालों को समझाया गया और गोवंश को विद्यालय से बाहर निकलवाया गया है, इसके बाद विद्यालय में पढ़ाई शुरू कराई गई।
-किशोर गुप्त, एसडीएम बिसौली