-डिपो के अंदर तेल भरवाते वक्त हुई घटना, चालक को चोट लगी
-दो दिन पहले हुआ था हादसा, फिर भी नहीं लिया सबक
रोडवेज की कंडम हो चुकी बसों में कई खराबियों के बाद भी उनके संचालन पर रोक नहीं लग सकी है। मंगलवार को तकनीकी खराबी के कारण डीजल लेने के लिए लाइन में लगी डग्गामार बस के ब्रेक फेल हो गए थे, हादसे में चालक सुबोध बाल-बाल बच गया था। इस हादसे को दो दिन ही बीते थे कि गुरुवार को फिर एक हादसा हो गया। डीजल लेने लाइन में खड़ी रोडवेज की डग्गामार बस के स्टार्ट करते ही उसके ब्रेक फेल हो गए, बस अचानक आगे खड़ी बस में जा घुसी। हादसे में चालक अखिलेश को मामूली चोट आई है, जबकि बस का शीशा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हादसे में यात्री भी बाल-बाल बच गए। रोडवेज चालकों का कहना है कि वह परिवहन विभाग के अधिकारियों को कई बार इन कंडम बसों की जानकारी दे चुके है, लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया गया है।
बता दें कि रोडवेज डिपों में एक दर्जन से ज्यादा बसें कंडम हो चुकी हैं फिर भी उनको अधिकारी चलवा रहे हैं। गनीमत यह है कि दो कंडम बसों के ब्रेक फेल तब हुए जब वह डिपो में तेल भरवा रहीं थीं, अगर यह हादसा सवारियों को ले जाते वक्त हुआ होता तो इससे होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है लेकिन रोडवेज अफसरों का कहना है कि कंडम बसों का हटाया जा रहा है। इसके लिए परिवहन निगम निदेशालय को लिखा गया है।
पचास से अधिक कंडम हो चुकीं बसें दौड़ रहीं हाईवे पर
-तकनीकी खराबी के कारण हो चुके हैं कई हादसे, रोडवेज अधिकारी खामोश
यात्रियों को सावधान रहने की जरूरत है। रोडवेज की कई बसें सुरक्षित नहीं है, क्योंकि वे कंडम हो चुकी हैं। इसके बावजूद परिवहन निगम के अफसर इनका संचालन कराकर यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बदायूं डिपो में ऐसी पचास से अधिक कंडम बसें लगातार चलाई जा रही हैं, लेकिन डिपो ने इन खटारा बसों पर रोक नहीं लगाई है। कई चालक और परिचालक भी बताते है कि डग्गामार बस होने के बाद भी उन्हें लंबे रूट पर भेजा जा रहा है।
कुछ दिन पहले जीएम अताउर रहमान ने रोडवेज डिपो का निरीक्षण किया था। कई खामियां मिलने के बाद डग्गामार बसों के संचालन पर रोक और साफ-सफाई को कहा गया था बावजूद न तो डिपो की सफाई हुई और न ही अब तक खटारा बसों पर रोक लगी है। रोडवेज स्टैंड से फर्राटा भर रही खटारा बसें न केवल यात्रा के दौरान मुसाफिरों की यात्राको दुखद और तकलीफदेह बना रही हैं बल्कि उनकी जान के साथ खिलवाड़ कर रहीं हैं। डग्गामार बसों में न तो दरवाजे ठीक हैं, न दरवाजे ठीक से बंद होते हैं और न ही खिड़कियां सही सलामत रह गई हैं। कुछ बसें तो चलते वक्त लहराने लगती हैं। बदायूं डिपो में 124 बसें निगम की हैं, इनमें करीब 50 बसें पूरी तरह कबाड़ा हो चुकी हैं,जो 10 लाख किलामीटर से अधिक चल चुकी हैं। सब कुछ जानने के बाद भी रोडवेज प्रशासन के साथ-साथ जिला प्रशासन को भी यात्रियों की असुविधा से कोई फर्क नहीं पड़ता।
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क्या कहते है चालक
रोडवेज बस चालकों का कहना था कि कंडम हो चुकी बसों की स्थिति इतनी खराब है कि एक खराबी ठीक कराने के बाद दूसरी खराबी हो जाती है। चालकों की मानें तो लंबे रूट पर यात्रियों के साथ उन्हें भी अपनी जान पर खतरा मंडराता दिखाई देता है लेकिन अधिकारी इस पर गौर नहीं करते।
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सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट
डिपोमें गंदगी का हाल इतना बुरा है कि वहां खड़ा होना भी दूभर है। डिपो के वर्कशाप के पीछे कूड़े का ढेर महीनों से लगा है,नालियां पूरी तरह बंद है। कर्मचारी बतातें हैं कि एआरएम को इसकी जानकारी है फिर भी वह सफाई नहीं कराते। जीएम के निरीक्षण के बाद दो दिन पहले सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने भी डिपो का निरीक्षण कर साफ सफाई और डग्गामार बसों पर रोक लगाने को कहा था, लेकिन असर अभी तक देखने को नहीं मिला है।
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क्या कहना है एआएम का
एआएम राजेश कुमार ने बताया कि खटारा बसों की मरम्मत का काम लगातार चल रहा है। कुछ बसें कानुपर और बरेली में ठीक भी हो रही हैं।