गेहूं की फसल बर्बाद हो जाने पर यूं तो क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक किसानों की मौत हुई है लेकिन शासन से मात्र दो किसानों को ही राहत मिली है। एसडीएम की संस्तुति पर दो मृतक किसानों के आश्रितों को सात-सात लाख रुपये के चेक मिल चुके हैं। फसल बर्बाद होने पर सिसैया, दियूरी, सेरहा, काकोरी आदि गांवों में आधा दर्जन से अधिक किसानों की अस्वाभाविक मौत हुई थी। इनमें कुछ ने आत्महत्या की और कुछ की सदमे में मौत हो गई। एसडीएम ओपी तिवारी ने बताया कि शासन ने तीस वर्षीय सूरजपाल गढ़ा और साठ वर्षीय हरसहाय बुधुआ नगला की मौत पर राहत देने की पुष्टि की है। गढ़ा के सूरजपाल ने बबूल के पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। जबकि बुधुआ नगला के हरसहाय की सदमे के कारण खेत में ही मौत हो गई थी। मृतक सूरजपाल की पत्नी राधिका और हरसहाय के पुत्रों को शुक्रवार को सात-सात लाख रुपये की राशि मिल गई है। बदायूं में दोनों मृतकों के आश्रितों को चेक दिए गए हैं। एसडीएम तिवारी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बाकी मृतकों की भी मुख्यमंत्री राहत कोष से राहत के लिए संस्तुति भेजी गई है।
परिवार को नहीं मिली मदद
दातागंज। उसहैत क्षेत्र के काकोरी गांव के किसान मुनेंद्र गिरी ने भी गेहूं की फसल मारी जाने पर अवसाद में आकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सूत्रों के मुताबिक शासन से सहायता राशि के हकदार मुनेंद्र के भी परिवार वाले थे, लेकिन उनको सहायता नहीं मिली।
मृतक श्यामलाल के परिवार को भी नहीं मिली सहायता
दबतोरी। यहां दस मई को आत्महत्या करने वाले किसान श्यामलाल पुत्र प्रसादी के परिवार को भी अभी तक राहत के नाम पर कोई मदद नहीं मिली है। जबकि एसडीएम ने तीन दिन के अंदर तीस हजार नकद और अन्य लाभ दिलाने का भरोसा दिया था। हालांकि एसडीएम ने शासन को लिखकर भेज दिया है।