बदायूं। जिला पंचायती राज विभाग द्वारा दो अक्तूबर को जिले को खुले से शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद भी लोग अभी भी खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह ये है कि विभाग द्वारा शौचालय पूर्ण होने से पूर्व ही जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। उम्मीद थी कि इस साल जिला धरातल पर ओडीएफ घोषित होगा। लेकिन ऐसा हो न सका। ऐसा ही हाल जिले में बन रहे सार्वजनिक शौचालयों का है, जो मुख्य सड़कों पर दस-दस किलोमीटर के अंतर से बनाए जा रहे हैं। इन्हें भी इस साल पूरा नहीं किया जा सका।
शासन ने 2011 में हुए बेस लाइन सर्वें को आधार बनाते हुए प्रत्येक जिले में शौचालय बनवाने की अनुमति जिला पंचायती राज विभाग को दी। इसके तहत बदायूं में तीन लाख परिवार ऐसे मिले, जो पात्रता श्रेणी में आते थे। विभाग ने इन परिवारों के शौचालय बनवाकर दिए थे। जिसकी रिपोर्ट विभाग द्वारा शासन को भेजी गई। उसके बाद में शासन ने विभाग को निर्देशित किया कि वह बेस लाइन सर्वें से अलग पात्र लाभार्थियों का चयन करें। इसके बाद में विभाग को अगस्त 2018 में हुए सर्वे (एलओबी-1) में 66 हजार 885 परिवार मिले। विभाग के अनुसार उन्हें योजना का लाभ दिया गया। उसके बाद में फिर शासन के निर्देश पर विभाग ने सर्वे किया। इस सर्वे (एलओबी-2) में 10072 परिवार ऐसे मिले, जो पात्रता की श्रेणी में आ रहे थे। इनकी रिपोर्ट शासन को भेज दी, जिसके बाद में विभाग को धनराशि मिल गई, जो लाभार्थियों को दे दी गई। उसकेे बाद में विभाग के द्वारा जिले के ओडीएफ होने की रिपोर्ट शासन को भेज दी। अब जिले में नोडल अधिकारी द्वारा गांवों में शौचालयों की जांच की जा रही है। उनकी जांच में कई शौचालय अधूरे मिले रहे। इसमें विभाग के ओडीएफ होने के दावा हवाई साबित हो रहा है।
बजट केे अभाव में लटक गया था काम, नहीं हो सका पूरा
-तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने सड़क के किनारे सामूहिक शौचालय बनाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत उनका मकसद था कि राहगीरों को यात्रा के दौरान अगर कहीं पर प्रसाधन का उपयोग करना हो, तो वह उन्हें खुले में न जाना पड़े। इसको लेकर पहले चरण मेें जिले में करीब 25 सामूहिक शौचालय बनवाए जा रहे थे। शुरूआत में तो इन शौचालय का निर्माण तेजी से हुआ, लेकिन डीएम के स्थानांतरण होने के बाद में काम की गति धीमी हो गई। और बाद में बजट का अभाव में काम बीच में रुक गया। करीब एक माह बाद इस काम के लिए बजट मिला, जिसके बाद में काम दोबारा से शुरू हुआ। जिसके चलते ये काम इस साल पूरा नहीं हो सका।
शासन की तरफ से शौचालय बनाने जो लक्ष्य दिया गया, उस लक्ष्य को पूरा करते हुए जिले को ओडीएफ घोषित किया था। अब शौचालयों को सत्यापन कराया जा रहा है।
-डॉ. शरनजीत कौर, जिला पंचायत राज अधिकारी