सीडीओ ने मंगलवार को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) कार्यालय पर छापा मार दिया। जिला प्रबंधक समेत सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन कब्जे में लेने के बाद जांच शुरू की गई। शिकायत थी कि महिला समूहों की दी जाने वाली रकम में घपला किया जा रहा था और टैबलेट भी 15 के बजाए दस हजार रुपये का दिया जा रहा था। जांच में इस बाबत कुछ सुबूत मिले हैं। ऐसे कितने मामले हैं, यह जांच पूरी होने के बाद साफ होगा। फिलहाल सीडीओ खुद मान रही हैं कि यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो सकता है। फिलहाल उन्होंने दफ्तर सील करा दिया है।
एनआरएलएम से संबधित शिकायतें लगातार सीडीओ निशा अनंत के पास पहुंच रही थीं। मंगलवार को सीडीओ संपूर्ण समाधान दिवस बीच में ही छोड़कर विकास भवन स्थित एनआरएलएम कार्यालय में पहुंच गईं। इससे दफ्तर के कर्मचारी हक्का-बक्का रह गए। कारण यह था कि विकास भवन के कर्मचारियों को अंदाज था कि सीडीओ देर से ही आएंगी। एनआरएलएम कार्यालय के जो कर्मचारी उस वक्त दफ्तर में नहीं थे, उन्हें भी ढूंढकर बुलवा लिया गया। इसके बाद उन सबके मोबाइल फोन सीडीओ ने अपने पास रख लिये।
शिकायत थी कि शासन की ओर से रिवॉल्विंग फंड के 15 हजार रुपये समूह के खातों में भेजे तो जाते थे, मगर वह रकम किसी न किसी बहाने से बैंक खाते में पहुंचने के बाद निकाल ली जाती थी। इसके अलावा समूह की महिलाओं को कामकाज में आसानी के लिए दिए जाने वाले टैबलेट में भी गड़बड़ी पकड़ में आ गई। शासन एक टैबलेट के लिए 15 हजार रुपये देता है, मगर यह रकम महिलाओं को देकर वापस ले ली गई और 10 हजार रुपये कीमत का टैबलेट खुद खरीद कर दिए गए। इन्हीं शिकायतों को आधार बनाकर जैसे-जैसे उन्होंने फाइलों को चेक किया, उसमें परत दर परत खुलती गई। कई सुबूत भी मिले हैं। कर्मचारियों के फोन में भी लेखाजोखा मिला है। बताते हैं कि इन सारे मामलों की जानकारी विभागीय अधिकारी को भी थी, लेकिन उनके द्वारा कार्रवाई करने की जगह पर दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा था। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह घपला करोड़ों का हो सकता है।
लेखाकार को लगाई लताड़
जांच के दौरान सीडीओ ने लेखाकार से जानकारी चाही तो वह मुद्दे की बात से अलग हटकर अपनी सफाई देने लगा। इस पर सीडीओ ने उसकी जमकर लताड़ लगाई। कहा जो पूछा है उसका सही-सही जवाब दिया जाए। इधर-उधर की बात करने की कोई भी जरूरत नहीं है।
कई बार बच चुका है जिला प्रबंधक
एनआरएलएम में आउट सोर्सिंग पर तैनात जिला प्रबंधक तकसीर अहमद पर पहले भी कई गंभीर आरोप लगे हैं। इसमें एक आरोप तो एक समूह की महिला ने लगाया था। जब तब लगे आरोपों की जांच हुई, मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। ऐसे में फिर यह सवाल विकास भवन के कर्मचारियों के जहन में उठा रहा है कि क्या इस बार कुछ कार्रवाई होगी या नहीं।
घनघनाते रहे करीबियों के फोन
सीडीओ के कब्जे के दौरान जिला प्रबंधक, लेखाकार समेत अन्य कर्मचारियों के फोन पर उनके करीबियों की कॉल तुरंत आना शुरू हो गई। चूंकि फोन सीडीओ के सामने रखे थे, ऐसे में उन खास लोगों के नाम भी सीडीओ के सामने साफ हो गए।
अभी जांच चल रही है। मामला काफी गंभीर है। गरीब महिलाओं के लिए शासन ने योजनाओं को शुरू किया है। उनका महिलाओं को लाभ नहीं मिलने दिया जा रहा है। ये अपराध की श्रेणी में आता है। दोषियों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। - निशा अनंत, सीडीओ