तीन साल पहले दिल्ली के वसंत बिहार इलाके में चलती बस में युवती के साथ गैंगरेप हुआ था। दरिंदगी की हदें पार करने वाली इस घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। आरोपियों में एक नाबालिग इस्लामनगर से पांच किमी दूर एक गांव का था। जुवेनाइल कोर्ट ने दोषी साबित होने पर उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया था। रविवार को उसकी रिहाई हो गई। बाल सुधार गृह से छूटने के बाद उसके अपने गांव पहुंचने की संभावनाओं पर बिसौली रोड स्थित इस गांव में सुबह सात बजे से ही न्यूज चैनल की ओवी वैन और मीडिया से जुड़े लोगों का जमावड़ा शुरू हो गया था। लग्जरी गाडिय़ों के काफिले पहुंचने का क्रम रविवार दोपहर तक जारी रहा। इससे पहले जिले में कुछ ऐसा ही नजारा कटरा सआदतगंज में दो बहनों की पेड़ पर लटके हुए शव मिलने के बाद नजर आया था। इस दौरान एसओ सीपी सिंह भी फोर्स के साथ सुबह से ही गांव में जमे रहे।
छह भाई-बहनों के परिवार में दोषी सबसे बड़ा है। आठ साल की उम्र में ही वह दिल्ली चला गया था। दो छोटी बहनें और तीन भाइयों के साथ बीमार मां को दोषी का इंतजार है। परिवार वालों का कहना है कि अगर वह घर आता है, तो संग रहकर खेती-मजूदरी करेगा। हालांकि, उसका पिता मंदबुद्धि है। सो परिवार की उम्मीद उससे अधिक जुड़ी इुई है लेकिन गांव के अन्य लोग उसके यहां आने के खिलाफ हैं। हालांकि कैमरे के आगे आकर ये लोग यह कहने से बचते हैं।
निर्भया के दोषी के गांव आने संबंधी कोई अधिकारिक सूचना नहीं मिली थी। हम मीडिया रिपोर्ट के आधार पर एहतियात बरत रहे हैं। गांव में पुलिस तैनात की गई है। पूरी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
- सौमित्र यादव, एसएसपी