बेसिक शिक्षा परिषद के जूनियर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब जमीन पर नहीं बैठेंगे। उन्हें बैठने को बैंच और मेज (फर्नीचर) उपलब्ध कराने को शासन ने बजट जारी कर दिया है। बदायूं के लिए एक करोड़ 28 लाख रुपये प्राप्त हो गया है। जल्द ही प्रत्येक जूनियर हाईस्कूल की विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के खाते में धनराशि पहुंच जाएगी। नए सत्र से पहले ही यह फर्नीचर खरीदना होगा। पहले चरण में उन स्कूलों को फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा। जहां पर 100 से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं।
कांवेंट स्कूलों से मुकाबले को शासन का बेसिक शिक्षा पर पूरा ध्यान है। निजी स्कूलों की ओर जाने वाले बच्चों को रोकने के लिए सरकार तरह-तरह की योजनाएं चला रही है। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को एमडीएम के साथ ही दो जोड़ी नि:शुल्क यूनिफार्म, मौजे, स्वेटर, जूते, किताबें दी जातीं हैं। फिर भी बच्चे परिषदीय स्कूलों में कम ही पढ़ते हैं। जूनियर का कोई भी बच्चा अब जमीन पर फर्श पर बैठकर नहीं पढ़ेगा। प्रत्येक जूनियर हाईस्कूल में बैंच और मेज उपलब्ध कराने को प्रदेश सरकार ने बजट जारी किया है। नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही सभी जूनियर स्कूलों में फर्नीचर खरीदने के निर्देश आला अफसरों दिए गए हैं।बीएसए पीसी यादव ने बताया कि बदायूं के जूनियर स्कूलों में बैंच और मेज खरीदने को शासन की ओर से एक करोड़ 28 लाख रुपये जारी किए हैं। जिले में इस वक्त 656 जूनियर हाईस्कूल हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही यह धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) के खाते में पहुंच जाएगी। फिर नए सत्र से पहले यह फर्नीचर खरीद लिया जाएगा। हर स्कूल में फर्नीचर होने से निश्चित तौर पर बच्चों के नामांकन में इजाफा होगा। प्रथम चरण में उन स्कूलों को फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा जहां पर सौ से ज्यादा बच्चे पंजीकृत हैं। ऐसे जिले में लगभग 160 विद्यालय हैं।
जिले के बहुत से स्कूलों में पहले भी दिया जा चुका है फर्नीचर
जिले के कई जूनियर स्कूल ऐसे भी हैं जहां पर पूर्व में भी बैंच और मेज उपलब्ध कराए गए हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह भी देखा जा रहा है कि किस विद्यालय में कितनी बैंच और मेज की आवश्यकता है उसी के हिसाब से धनराशि दी जाएगी। हर स्कूल में नामांकित बच्चों की संख्या विभाग के पास पहले से ही है।