दमकल विभाग एक बार फिर से संसाधनों के अभाव में अग्निकांडों से मुकाबला करेगा। जिले में हर साल अग्निकांडों से जन-धन की काफी हानि होती है। स्थिति यह है कि अग्निकांडों से निपटने के लिए विभाग के पास सिर्फ तीन फायर ब्रिगेड और एक पंपिंग सेट है। स्टाफ की भी काफी किल्लत है।
अग्निकांडों का सीजन शुरू हो चुका है। पिछले दिनों बिसौली में कॉस्मेटिक गोदाम में लगी आग से करीब 40 लाख रुपये का सामान जलकर राख हो गया था। तीन दिन पहले कादरचौक क्षेत्र के रामताल गांव में हुए अग्निकांड में तीन घर राख हो गए थे। यहां आठ साल की एक बच्ची की भी जिंदा जलकर मौत हो गई थी। फायर स्टेशन के नाम पर जिले की बिसौली, बिल्सी और दातागंज तहसील में कुछ नहीं है। सहसवान तहसील में फायर स्टेशन जरूर है। यहां संसाधन के नाम पर एक फायर ब्रिगेड है।
दूरदराज के इलाकों में होती है तबाही
बदायूं। अग्निकांडों से ज्यादातर तबाही दूर-दराज के इलाकों में होती है। बदायूं से बिसौली तहसील क्षेत्र के कस्बा ओरछी की दूसरी करीब 65 किलोमीटर है। अगर बिसौली तहसील क्षेत्र में कोई अग्निकांड होता है तो फायर ब्रिगेड को पहुंचने में दो घंटे लग जाते हैं। बिसौली में फायर स्टेशन न होने से अग्निकांडों तबाही का सबब बनते हैं। इसी तरह दातागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हजरतपुर की दूरी बदायूं से करीब 60 किलोमीटर है।
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घनी आबादी में हाईडेंट बने परेशानी
बदायूं। फायर ब्रिगेड में पानी भरने के लिए शहर में 18 हाईडेंट हैं। इनमें ज्यादातर घनी आबादी में होने की वजह से फायर ब्रिगेड वहां तक पहुंच ही नहीं पाती। मोहल्ला खंडसारी और छह सड़का के हाईडेंट तो विलुप्त हो गए हैं। नगर पालिका को इनसे कोई सरोकार नहीं है। इसके अलावा फायर ब्रिगेड में लिए महिला अस्पताल, कोतवाली सदर, वाटर वर्क्स में नलकूप से पानी भरने की व्यवस्था है। यह इलाके भी घनी आबादी में है।
सीमित संसाधनों के जरिए दमकल विभाग हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। दमकल विभाग की पूरी कोशिश है कि अग्निकांडों से जन-धन हानि न हो। अगर कोई हाईडेंट खराब है, तो उसे ठीक कराया जाएगा। बिसौली और दातागंज में फायर स्टेशन खोलने के प्रस्ताव हैं। -श्रीनिवास शर्मा, जिला अग्निश्मन अधिकारी