बदायूं में आठ महीने से दर-दर की ठोकरें खा रही निशा को आखिरकार पति का साथ मिला। पुलिस व परिजनों के प्रयास के चलते शुक्रवार को महिला थाने में दोनों के बीच शिकायतों का दौर खत्म कराया गया। दोनों के बीच लिखित समझौता हुआ। इसके बाद दंपती दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
मूसाझाग थानाक्षेत्र के तालगांव निवासी निशा ने बुधवार सुबह एसएसपी कार्यालय गेट के सामने विषाक्त पदार्थ खा लिया था। निशा ने पुलिस को बताया कि उसकी बेटी के दिल में छेद है। इसके चलते पति व ससुराल पक्ष ने उससे दूरी बनाकर बेघर कर दिया। आठ महीने से वह इधर-उधर मेहनत मजदूरी करते हुए बेटी का इलाज करा रही है, लेकिन पति व ससुराल पक्ष के लोग न साथ दे रहे हैं और न उनका कोई पता चल रहा है। इसको लेकर निशा ने 12 जुलाई को पुलिस कार्यालय में पति व ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के खिलाफ शिकायती पत्र दिया था। पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच महिला थाना पुलिस को सौंपी थी।
पति समेत पांच लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी रिपोर्ट
पुलिस निशा के पति का पता लगा रही थी कि इससे पहले बुधवार की सुबह निशा ने जहर खा लिया। पुलिस ने उसके शिकायती पत्र के आधार पर पति समेत पांच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इधर, निशा ने पुलिस को बताया कि उसे पति के साथ रहना है। वह उसे साथ रखे या नहीं, लेकिन वह बेटी का इलाज कराए।
इसके चलते पुलिस ने मुशर्रफ को तलाशना शुरू किया। उसकी लोकेशन जम्मू-कश्मीर में मिली। पुलिस ने परिचितों के जरिए उसे बदायूं बुलवाया। शुक्रवार को महिला थाना एसओ पूनम सिंह व मूसाझाग एसओ मान बहादुर सिंह ने दोनों को बैठाकर काउंसलिंग की। परिजनों ने दंपती को समझाया।
पुलिस ने मुशर्रफ को दी हिदायत
दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप भी लगाए, लेकिन पुलिस ने आरोपों को खत्म कराते हुए निशा व मुशर्रफ को एक साथ रहने के लिए समझाया। इसके बाद पुलिस व परिजनों के प्रयास के चलते दोनों एक साथ रहने को राजी हुए। पुलिस ने मुशर्रफ को कार्रवाई की हिदायत भी दी। एसओ मान बहादुर सिंह ने बताया कि दंपती एक साथ रहने के लिए राजी हो गए हैं। लिखित समझौता कराया गया है।