बदायूं। जिला महिला अस्पताल में बना रैन बसेरा सिर्फ कागजों और निरीक्षण रिपोर्ट तक ही सीमित होकर रह गया है। इसे तीमारदारों के उपयोग के लिए खोला ही नहीं गया। नतीजा यह है कि महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन खुले बरामदे, सीढ़ियों और जमीन पर रात गुजारने के लिए मजबूर हैं।
भीषण ठंड को देखते हुए शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सो पाए। सभी सार्वजनिक स्थानों पर रैन बसेरों की समुचित व्यवस्था हो। इसके तहत जिले में रोडवेज परिसर, जिला अस्पताल सहित कई स्थानों पर अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं। लेकिन, जिला महिला अस्पताल में बने रैन बसेरे का लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
तीमारदारों का कहना है कि उन्होंने कर्मचारियों से गुहार लगाई, लेकिन इससे नहीं खोला गया। इससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई हैं, जबकि मानवीय संवेदनाएं पूरी तरह गायब हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि महिला अस्पताल में अधिकतर गर्भवती महिलाएं, नवजात और गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। जिनके तीमारदारों का रात में बाहर ठंड में रहना न केवल अमानवीय है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी खतरनाक है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
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जिला अस्पताल, रोडवेज पर बना अस्थायी रैन बसेरा चल रहा
- शासन से निर्देश मिलने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से रैन बसेरा शुरू करवा दिया गया। यहां तक की वहां पर हीटर की भी व्यवस्था की गई है। यहीं हाल रोडवेज परिसर में बने अस्थायी रैन बसेरा का है। यहां पर महिला और पुरुषों के रुकने के लिए अलग-अलग व्यवस्था की है। वहीं, रात में नौ बजकर पांच मिनट पर जिला अस्पताल और रात नौ बजकर 10 मिनट पर महिला अस्पताल में अलाव जलता हुआ मिला।
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- पहले भी जिला महिला अस्पताल की सीएमएस को रैन बसेरा खोलने के निर्देश दिए थे। बावजूद लापरवाही की जा रही है। अगर स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ उच्च अधिकारियों के लिए पत्राचार किया जाएगा।
-डॉ. रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ बदायूं
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-ठंड में कोई व्यक्ति बाहर न लेटे, इसके लिए सभी ईओ को निर्देश दिए हैं। व्यवस्थाएं पहले से बेहतर हुईं हैं। उनको और बेहतर करने के निर्देश दिए गए हैं।
-अरूण कुमार, एडीएम प्रशासन
जिला महिला अस्पताल में रात नौ बजकर 15 मिनट जमीन पर सो रहे तीमारदार। संवाद
जिला महिला अस्पताल में रात नौ बजकर 15 मिनट जमीन पर सो रहे तीमारदार। संवाद