कछला घाट पर मौजूद लापता युवक के परिजन। संवाद
उझानी। कछला गंगाघाट पर सुविधा और सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं होने से श्रद्धालुओं की जान पर जोखिम बना रहता है। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर से घाट पर न तो पीएसी के गोताखोर तैनात किए जाते हैं और न ही मोटर वोट की व्यवस्था हुई है। जब भी कोई हादसा हुआ, अगले दिन जल्द ही इंतजाम करा देने का शोर मचने लगता है। गंगाघाट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए बदायूं, बरेली, पीलीभीत, कासगंज, एटा, मथुरा और हाथरस के अलावा राजस्थान और मध्यप्रदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व के दौरान घाट पर प्रशासनिक स्तर से अस्थायी इंतजाम कर दिए जाते हैं, लेकिन सामान्य दिनों में घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के मद्देनजर कोई इंतजाम नहीं नहीं आता।
दुकानदारों में राजपाल कहते हैं कि सामान्य दिनों में प्रत्येक रविवार के अलावा भी घाट पर श्रद्धालु नजर आते हैं। वह जब डुबकी लगाने के लिए गंगा में पहुंचते हैं तो उन्हें जलस्तर के अंदर गहराई का भी अंदाजा नहीं होता।
अप्रैल से जुलाई महीना के दौरान जब गर्मी पड़ती है तो श्रद्धालु स्नान के लिए गंगा में कमर से अधिक जलस्तर की ओर बढ़ जाते हैं। ऐसे में हादसा होने की स्थिति में नाविकों के बूते ही श्रद्धालुओं को बचाने की कोशिश की जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि घाट पर पीएसी के गोताखोरों को तैनात कर दिया जाए तो हादसा होने की स्थिति में श्रद्धालुओं को समय रहते बचाया भी जा सकता है।