बदायूं में नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले में शनिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। वकीलों की अनुपस्थिति के चलते सिविल कोर्ट ने सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अक्तूबर को तय की गई है। उस दिन मुस्लिम पक्ष अपनी बहस अदालत के समक्ष रखेगा।
नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद प्रकरण सिविल जज (सीनियर डिवीजन) फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन है। मुस्लिम पक्ष की ओर से लगातार यह दलील दी जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनज़र इस मामले की सुनवाई नहीं हो सकती। वहीं, हिंदू पक्ष का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि मामले की सुनवाई पर रोक है।
हिंदू पक्ष का दावा- जहां पर मस्जिद, वहां पहले मंदिर था
गौरतलब है कि यह मुकदमा वर्ष 2022 से लंबित है। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल सहित कई अन्य हिंदूवादी नेता इस मामले में वादी बने हुए हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि जामा मस्जिद की जगह पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था, जिसे बाद में आक्रांताओं ने बदलकर मस्जिद का रूप दे दिया। उनका कहना है कि मंदिर का शिवलिंग अब भी शहर के दरीबा स्थित मंदिर में मौजूद है।
इस बीच, पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत हो चुकी है। मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दी जा रही है कि वहां सदैव मस्जिद ही रही है, मंदिर के अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं है और यह मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बहस जारी है।