हजरत अली की यौमे विलादत के मौके पर सैदपुर कस्बे में अकीदतमंदों ने मोहल्ला खेड़ा स्थित गुलाम हुसैन दादा मियां वाली मस्जिद में महफिल सजाई। इसके साथ ही नूरी रजा मेमोरियल कॉलेज में अंजुमन रजा-ए-मुस्तफा की जानिब महफिल सजाई गगई। शुरूरात तिलावते कलाम-ए-इलाही से हुई। नात व मनकवत का दौर चला। इसके बाद उलमाओं ने मौला अली शेरे खुदा की जिंदगी पर रोशनी डाली।
इरफान सकलैनी ने पढ़ा-
खुशी हो ग़म हो कुछ भी हो खुदा को याद कर लेना,
मुसीबत में मुहम्मद मुस्तफा को याद कर लेना।
अकरम अजहरी ने पढ़ा-
आका ने देके हाथ में इस्लाम का अलम,
मौला अली को फातेह खैबर बना दिया।
हाफिज रिजवान कुरैशी ने पढ़ा-
कभी दीवार हिलती है कभी दर कांप जाता है,
अली का नाम सुनकर अब भी खैबर कांप जाता है।
सैय्यद जहीरूल हसन ने कहा-
मुसीबत रंजो गम आलाम जब हद से गुजरते हों,
तो फिर मौला अली मुश्किल कुशा को याद कर लेना।
इसके साथ ही हाफिज रिजवान ने तकरीर पेश की। सलातो सलाम पेश कर कौम व मुल्क के लिए दुआ की गई। शिरीनी बांटी गई। इस मौके पर सालिक हुसैन, हाजी स्वालेह अली, रहमत अली, शाहिद हुसैन कुरैशी, हाफिज नौशाद रजा मौजूद रहे। दरगाह नजफ अशरफ, नूरी चौक, पश्चिम, ख्वाजा चौक आदि मोहल्लों में लंगर तस्कीम किया गया।
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आज आएंगे अजहरी मियां
सैदपुर। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजले बरेलवी के चश्मो चराग हुजूर अख्तर रजा अजहरी मियां की कस्बे में आमद को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। वह शुक्रवार को बाद नमाजे मगरिब यहां आएंगे। सैय्यद इंटर कॉलेज में आयोजित महफिल में शिरकत करेंगे। यह जानकारी सैय्यद मसरूफ अली ने दी।