उझानी में शादी के दौरान मुंहबोली बहन के साथ मौजूद रियासत और उनकी पत्नी। स्रोत: स्वयं
उझानी। मुस्लिम दंपती ने बुधवार की रात एक शादी में कौमी एकता की मिसाल पेश की। मुस्लिम दंपती ने युवती को बहन मानकर रिश्ता निभाते हुए शादी के वक्त मां-बाप की भांति सभी रस्में निभाईं। शादी की दावत से लेकर दहेज का सामान भी भेंट किया।
साहूकारा मोहल्ला निवासी दीपांशी वार्ष्णेय और कमलकांत की शादी कस्बे के एक बरातघर में हुई। शादी की सभी रस्में मोहल्ले के रियासत उर्फ बबलू और उनकी पत्नी शबनम ने संपन्न कराईं। बता दें कि दीपांशी के पिता हरीशंकर का उस समय निधन हो गया था, जब वह करीब डेढ़ साल की थीं। मां कुसुमलता ने कोरोना काल में दम तोड़ दिया था।
पिता के निधन के बाद ही बबलू ने दीपांशी को बहन मान लिया था। तीज-त्योहार पर भी दोनों ने भाई-बहन के रिश्ते को निभाया। बबलू ने दीपांशी की इच्छा के अनुरूप मोहल्ले के ही कमलकांत के साथ उसकी शादी तय की। गोद भराई से लेकर मेहंदी और कन्यादान से लेकर विदाई तक की सभी रस्में बबलू ने अपनी पत्नी शबनम के साथ निभाईं।
दीपांशी कहती हैं कि बबलू ने दावत का खर्च उठाया और दहेज से जुड़ा सभी सामान भेंट किया। दूल्हा कमलकांत भी काफी खुश नजर आए। कहा कि बबलू ने इन्सानियत का फर्ज निभाया है। बता दें कि कमलकांत के पिता नहीं हैं।